Kidney Stone During Pregnancy: प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। ऐसे में कमर या पेट के एक तरफ तेज दर्द, पेशाब करते समय जलन या पेशाब में खून जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे सामान्य गर्भावस्था की परेशानी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इन लक्षणों के पीछे किडनी या यूरेटर में पथरी भी एक वजह हो सकती है। गर्भावस्था में किडनी स्टोन का इलाज सामान्य स्थिति से थोड़ा अलग हो सकता है, क्योंकि डॉक्टर को एक साथ मां और गर्भ में पल रहे बच्चे की सुरक्षा का ध्यान रखना होता है। हालांकि, हर पथरी की स्थिति गंभीर नहीं होती और कई मामलों में डॉक्टर निगरानी व उचित उपचार के जरिए स्थिति को संभाल सकते हैं।

प्रेगनेंसी में किडनी स्टोन का पता कैसे चलता है?
अगर डॉक्टर को पथरी का संदेह होता है तो आमतौर पर अल्ट्रासाउंड को शुरुआती जांच के तौर पर प्राथमिकता दी जाती है। अल्ट्रासाउंड में आयोनाइजिंग रेडिएशन का इस्तेमाल नहीं होता और इससे किडनी तथा यूरिनरी सिस्टम में रुकावट के संकेत देखे जा सकते हैं। कुछ मामलों में अगर स्थिति स्पष्ट न हो तो डॉक्टर गर्भावस्था और मरीज की स्थिति को ध्यान में रखते हुए अन्य जांचों पर भी विचार कर सकते हैं। कौन सी जांच जरूरी है, इसका फैसला डॉक्टर ही करते हैं।

क्या हर किडनी स्टोन में ऑपरेशन जरूरी है?
नहीं। अगर पथरी छोटी है, पेशाब का प्रवाह बाधित नहीं हुआ है, दर्द नियंत्रित है और संक्रमण के संकेत नहीं हैं, तो डॉक्टर मरीज की स्थिति पर नजर रखते हुए कंजर्वेटिव ट्रीटमेंट अपना सकते हैं। पथरी के इलाज का फैसला उसके आकार, स्थान, पेशाब के रास्ते में रुकावट और मरीज के लक्षणों के आधार पर किया जाता है।

प्रेगनेंसी में पेनकिलर लेना कितना सुरक्षित?
गर्भावस्था के दौरान खुद से कोई पेनकिलर या पथरी की दवा लेना उचित नहीं है। दर्द की दवा का चुनाव गर्भावस्था के कितने सप्ताह चल रहे हैं और मां-बच्चे की स्थिति कैसी है, इन बातों पर निर्भर करता है। इसलिए कमर या पेट में तेज दर्द होने पर मेडिकल स्टोर से अपनी मर्जी से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

कब पड़ सकती है प्रक्रिया या सर्जरी की जरूरत?
अगर पथरी की वजह से यूरिन का रास्ता गंभीर रूप से बाधित हो जाए, दर्द लगातार बना रहे, किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगे या पथरी के साथ संक्रमण हो जाए, तो सिर्फ निगरानी पर्याप्त नहीं हो सकती। ऐसी परिस्थितियों में डॉक्टर यूरेटरिक स्टेंट या पर्क्यूटेनियस नेफ्रोस्टॉमी जैसे विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। कुछ चुनिंदा मामलों में विशेषज्ञ यूरेटेरोस्कोपी के जरिए पथरी को हटाने या तोड़ने का विकल्प भी चुन सकते हैं। यूरेटेरोस्कोपी में एक पतले उपकरण को यूरिनरी मार्ग से पहुंचाकर पथरी को निकाला या छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाता है। वहीं, शॉक-वेव लिथोट्रिप्सी (SWL) गर्भावस्था में इस्तेमाल नहीं की जाती।

बुखार के साथ पथरी के लक्षण हों तो तुरंत दिखाएं डॉक्टर को
प्रेगनेंसी में निम्न लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:

  • कमर या पेट में तेज और लगातार दर्द
  • पेशाब में खून आना
  • पेशाब करते समय तेज जलन या दर्द
  • पेशाब कम आना या रुकावट महसूस होना
  • बुखार या ठंड लगना
  • उल्टी के साथ तेज दर्द

पथरी के साथ संक्रमण का संदेह
खासकर तेज दर्द के साथ बुखार या ठंड लगना गंभीर संक्रमण का संकेत हो सकता है और ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है। किडनी स्टोन के साथ संक्रमण और रुकावट होने पर स्थिति ज्यादा गंभीर हो सकती है।

घबराने के बजाय समय पर लें मेडिकल सलाह
प्रेगनेंसी के दौरान किडनी स्टोन का मतलब हमेशा मां या बच्चे के लिए बड़ा खतरा नहीं होता। लेकिन पथरी के साथ यूरिन में रुकावट या संक्रमण जैसी समस्या पैदा होने पर तत्काल इलाज जरूरी हो सकता है। इसलिए असामान्य दर्द, पेशाब में खून या बुखार जैसे लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय स्त्री रोग विशेषज्ञ और जरूरत पड़ने पर यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करना बेहतर है।

Disclaimer: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। गर्भावस्था में किसी भी दवा, पेनकिलर या पथरी के उपचार का फैसला खुद से न लें। लक्षण दिखाई देने पर अपने डॉक्टर से जांच और उपचार की सलाह लें।