रायपुर। सैयां भए कोतवाल तो डर काहे का! छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग में आजकल यह कहावत पूरी तरह से चरितार्थ हो रही है। यहां आई.ए सिद्दीकी नाम के अधिकारी दामाद की हैसियत का फुल मजा लूट रहे हैं। हर तरफ उनके ही पौ बारह हैं। सिद्दीकी को इस बात का पूरा इल्म है कि जब तक उनके 'पापा जी' विभाग में बैठे हैं, कोई उनका बाल भी बांका नहीं कर सकता। रसूख का नशा कुछ ऐसा है कि प्रदेश के मुखिया का आदेश भी इनके आगे पानी भर रहा है।

विधानसभा में सीएम ने कही थी कार्रवाई की बात

विष्णुदेव साय छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने प्रदेश की पवित्र विधानसभा के पटल पर बकायदा अपना लिखित बयान दिया था। सीएम साय ने सदन में कहा था कि समय से पहले अतिरिक्त निष्पादन सुरक्षा निधि (टीडीआर) जारी करने के मामले में तीन अफसर पूरी तरह दोषी हैं। इन अफसरों में आईए सिद्दीकी, सुशील कुमार गुप्ता और टीके मजूमदार का नाम शामिल है। मुख्यमंत्री ने इन तीनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही थी। पर जल संसाधन विभाग के भीतर की सियासत ही एकदम अलग चल रही है।

सजा की जगह थमा दिया प्रमोशन का तोहफा

राजेश सुकुमार टोप्पो और रवींद्र मेंढेकर की जोड़ी ने सिद्दीकी की रक्षा में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इन दोनों ने सिद्दीकी की हिफाजत के लिए मानो जी-जान लगा दिया है। सूबे के मुखिया की घोषणा का यहां कोई असर नहीं दिखा। सजा देना तो दूर की बात है, उल्टे फरवरी 2026 में सिद्दीकी को प्रमोशन का तोहफा थमा दिया गया।

दिखावे के लिए रोकी वेतन वृद्धि, बिना जांच फरमान

जनता और सरकार की आंखों में धूल झोंकने के लिए दिखावे की गजब विभागीय कार्यवाही की गई। रवींद्र मेंढेकर ने भी क्या खूब दिमाग पाया है। बिना किसी को भनक लगे, सिद्दीकी की वेतन वृद्धि रोक दी गई। मेंढेकर साहब आखिर क्या दिखाना चाहते हैं? बिना निलंबन, बिना जांच और बिना विभागीय प्रक्रिया के किसी अफसर को ऐसी सजा कैसे मिल सकती है? बिना अनुशासनात्मक कार्रवाई के आखिर वेतन वृद्धि रोकने का फरमान कैसे जारी हो सकता है? बिना निलंबन और जांच के सजा मुकर्रर करने का यह तरीका सिर्फ कागजों का पेट भरने वाली चाल थी।

बिलासपुर के एनीकट का है मामला

सिद्दीकी के ये कारनामे बिलासपुर जिले के हैं। वहां के दबेना एनीकट और केकराडीह एनीकट योजना में टीडीआर यानी अतिरिक्त निष्पादन सुरक्षा निधि को समय पूर्व विमुक्त कर दिया गया। इसी टीडीआर विमुक्ति वाले गोलमाल में सिद्दीकी पर आरोप लगे हैं। अब हर किसी की नजर टोप्पो और मेंढेकर की इस जुगलबंदी पर टिकी है। लोग देखना चाहते हैं कि यह जोड़ी सिद्दीकी को बचाने के लिए आखिर किस-किस मोर्चे पर ढाल बनेगी। आखिर यह जोड़ी सिद्दीकी को कहां-कहां बचाएगी?

हाईकोर्ट के आदेश की भी निकाल ली गली

मंत्रालय से लेकर विभागाध्यक्ष कार्यालय तक बस यही चर्चा है कि आखिर यह सिद्दीकी किसका दामाद है? अतिरिक्त निष्पादन सुरक्षा निधि को समय से पहले रिलीज करने के दो-दो पुख्ता प्रकरण सामने आ चुके हैं। फिर भी जल संसाधन विभाग इस दामाद को सिर-माथे पर बिठाकर चल रहा है। सब नियम-कानून ताक पर रख दिए गए हैं।

बिलासपुर उच्च न्यायालय ने भी इसी मामले में अपना डंडा चलाया था। हाईकोर्ट ने पदोन्नत अधीक्षण अभियंता के पद पर सिद्दीकी की पदस्थापना पर रोक का आदेश जारी कर दिया था। अदालत का आदेश आते ही विभाग में हड़कंप मच गया। लेकिन विभाग के हुक्मरानों ने अदालत के आदेश की भी काट खोज ली। न्यायालय की अवमानना से बचने के लिए अफसरों ने अपनी गली निकाल ली। अदालत के आदेश के बाद सिद्दीकी को अधीक्षण अभियंता के स्थान पर अब सीधे प्रभारी मुख्य अभियंता (बोधी) बना दिया गया है।