
रायपुर। उद्योगपति अनिल अग्रवाल के वेदांता ग्रुप पर प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने एक बड़ी कार्रवाई की है। विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम यानी फेमा के कथित उल्लंघन के मामले में ईडी की टीमों ने दिल्ली मुंबई और राजस्थान सहित कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है। रिपोर्ट्स के अनुसार यह जांच सोमवार से ही शुरू हो गई थी और मंगलवार दो जून को भी कंपनी के अलग अलग दफ्तरों में तलाशी अभियान लगातार जारी रहा।
ईडी की कार्रवाई से मचा हड़कंप
प्रवर्तन निदेशालय की इस अचानक हुई कार्रवाई से बिजनेस जगत में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों की टीमों ने सोमवार को मुंबई और दिल्ली में कंपनी के मुख्य कार्यालयों में पहुंचकर जरूरी दस्तावेज खंगाले। ईडी मुख्य रूप से उन वित्तीय लेन देन की जांच कर रही है जो विदेशी मुद्रा के असामान्य ट्रांसफर से जुड़े हो सकते हैं। जानकारों का कहना है कि इस बड़ी कार्रवाई के कारण वेदांता ग्रुप की वित्तीय स्थिति और बाजार में उसकी साख पर बड़ा असर पड़ सकता है।
क्यों हो रही है यह छापेमारी
ईडी के सूत्रों के मुताबिक इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य फेमा के नियमों के उल्लंघन की गहराई से जांच करना है। अधिकारियों का कहना है कि अनिल अग्रवाल की कंपनी पर विदेशी मुद्रा से जुड़े नियमों का ठीक से पालन न करने का आरोप है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह पूरा मामला वेदांता लिमिटेड द्वारा अपनी पेरेंट कंपनी वेदांता रिसोर्सेज को किए गए सीमा पार यानी क्रॉस बॉर्डर रॉयल्टी भुगतान और विदेशी मुद्रा के ट्रांसफर से जुड़ा हुआ है। कुछ वित्तीय आंकड़े और संदिग्ध ट्रांजैक्शन की जानकारी सामने आने के बाद जांच एजेंसी ने यह बड़ा कदम उठाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच अधिकारी जल्द से जल्द इसकी तह तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं।
निवेशकों की बढ़ी चिंता
वेदांता ग्रुप भारत की बड़ी खनन और मेटल कंपनियों में से एक माना जाता है। अनिल अग्रवाल के नेतृत्व में यह ग्रुप धातु ऊर्जा और माइनिंग के क्षेत्र में बहुत बड़ा काम करता है। देश के विकास और औद्योगिक तरक्की में इस कंपनी का हमेशा बड़ा योगदान रहा है। लेकिन ईडी की इस तरह की बड़ी जांच से कंपनी की साख पर खराब असर पड़ सकता है। इसके साथ ही शेयर बाजार में निवेशकों की चिंताएं भी बढ़ सकती हैं जो किसी भी बड़ी कंपनी की ग्रोथ के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती हैं।
लेन देन में गड़बड़ी की आशंका
जांच के दौरान ईडी को वित्तीय लेन देन में कई तरह की गड़बड़ियों की आशंका हुई है। जांचकर्ताओं ने उन दूसरी कंपनियों और संगठनों से भी संपर्क साधा है जिनके साथ वेदांता ग्रुप ने पिछले कुछ समय में पैसों का लेन देन किया है। इससे यह साफ हो सकेगा कि क्या कंपनी ने विदेशी मुद्रा के लेन देन में देश के तय कानूनों का उल्लंघन किया है। भारत में जहां एक तरफ विदेशी निवेश को बढ़ावा देने की लगातार कोशिशें हो रही हैं वहीं दूसरी तरफ इतने बड़े ग्रुप पर इस तरह की कार्रवाई को काफी गंभीर माना जा रहा है।
कंपनी ने दी सफाई
वेदांता ग्रुप के प्रवक्ता ने इस पूरी कार्रवाई पर अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ किया है कि कंपनी जांच अधिकारियों को पूरा सहयोग दे रही है। अधिकारियों द्वारा मांगी जा रही सभी जरूरी जानकारियां और दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। कंपनी ने देश के सभी नियमों का पूरी तरह पालन करने की बात दोहराई है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में ईडी की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और वेदांता ग्रुप इस संकट से कैसे बाहर निकलता है।