बिलासपुर : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के एक फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। हत्या के मामले में दोषसिद्धि को गैर-इरादतन हत्या में बदलने और उम्रकैद की सजा घटाकर 10 साल करने के फैसले पर शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के न्यायिक दृष्टिकोण पर गंभीर टिप्पणी की। सुनवाई के दौरान जस्टिस जे बी पारदीवाला की अगुवाई वाली पीठ ने तीखे स्वर में कहा, “जरा हाई कोर्ट की दयनीय हालत तो देखिए। जजों को यह तक नहीं पता कि आईपीसी की धारा 304 पार्ट-I और पार्ट-II क्या है और आप उम्मीद करते हैं कि जज सबूतों को समझेंगे?” सुप्रीम कोर्ट ने मामले में याचिकाकर्ता और छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने पूछा है कि हाई कोर्ट का फैसला क्यों न निरस्त कर निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा बहाल कर दी जाए। हालांकि, शीर्ष अदालत ने फिलहाल हाई कोर्ट का फैसला रद्द नहीं किया है। मामले में अंतिम निर्णय पक्षकारों के जवाब और आगे की सुनवाई के बाद होगा।

 

हत्या की सजा उम्रकैद से बदल कर 10 साल

 

मामला महासमुंद जिले के सरायपाली से जुड़ा है। चिंतामणि उर्फ चिंटू पटेल को प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने 29 सितंबर 2022 को हत्या के मामले में दोषी ठहराया था। अदालत ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई थी। इस फैसले को आरोपी ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में चुनौती दी। हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने 29 नवंबर 2024 को अपील पर फैसला सुनाते हुए हत्या की दोषसिद्धि को धारा 302 से बदलकर धारा 304 के भाग-दो के तहत कर दिया। इसके साथ ही उम्रकैद की सजा घटाकर 10 वर्ष कर दी गई।

 

चोटों और हथियार पर नहीं किया विचार

 

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड से ऐसा प्रतीत होता है कि मृतका के शरीर पर आई चोटों की प्रकृति, घटना में इस्तेमाल किए गए हथियार और वारदात की शुरुआत से जुड़ी परिस्थितियों पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया। शीर्ष अदालत के अनुसार, इन पहलुओं का मामले में दोषसिद्धि तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण स्थान है। ऐसे में हत्या के अपराध को गैर-इरादतन हत्या में बदलने के फैसले के पीछे अपनाए गए दृष्टिकोण पर स्पष्टीकरण जरूरी है।

 

हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने की टिप्पणी

 

मूल रूप से आरोपी पर आईपीसी की धारा 302 के तहत हत्या का मुकदमा चला था। ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर उसे दोषी मानते हुए उम्रकैद सुनाई थी। बाद में हाई कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए अपराध की श्रेणी और सजा, दोनों में बदलाव कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान पूछा कि हाई कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद मौखिक गवाही और अन्य साक्ष्यों का उचित आकलन किया था। शीर्ष अदालत ने इस पर आरोपी से कारण बताने को कहा है कि हाई कोर्ट का आदेश क्यों न रद्द किया जाए और निचली अदालत का फैसला क्यों न बहाल किया जाए।

 

आरोपी और सरकार को नोटिस जारी

 

सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए आरोपी और छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी किया है। अब दोनों पक्षों को अपना जवाब देना होगा। आगे की सुनवाई में अदालत यह तय करेगी कि हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप किया जाना चाहिए या नहीं। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उसके आधार और कानूनी दृष्टिकोण पर जवाब तलब किया है।