बैगा समाज का अल्टीमेटम— भ्रष्ट अफसर निलंबित नहीं हुए तो सड़कों पर होगा उग्र आंदोलन।

 

कवर्धा। कबीरधाम जिले में आबकारी विभाग की घिनौनी करतूत सामने आई है। राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले विशेष संरक्षित बैगा जनजाति के लोग आबकारी अधिकारियों के खौफ से अपनी पुश्तैनी जमीनें और घर का अनाज तक बेचने को मजबूर हो गए हैं।

आरोप है कि आबकारी विभाग के सब-इंस्पेक्टर (SI) रायजादा और SI गीता ने क्षेत्र में अवैध वसूली का ऐसा रैकेट चलाया है, जिसने गरीबों की कमर तोड़ दी है। भोले-भाले आदिवासियों पर महुआ शराब के फर्जी और बढ़ाकर मामले दर्ज किए जा रहे हैं और जेल भेजने की धमकी देकर उनसे मोटी रकम ऐंठी जा रही है।

फर्जी केस का जाल बिछा कर लाखों की उगाही

बैगा समाज ने मुख्य सचिव और आबकारी आयुक्त को सौंपे गए शिकायत पत्र में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। पीड़ितों का कहना है कि अधिकारी 5 लीटर महुआ शराब पकड़ते हैं और कागजों में उसे 10 से 40 लीटर बताकर डराते हैं।

इसके बाद कोरे कागजों पर अंगूठे लगवाए जाते हैं। डरा-धमका कर 15 से 25 हजार रुपए तक की रिश्वत मांगी जाती है। पैसे न देने पर आदिवासियों पर सीधे केस बनाकर उन्हें जेल भेजा जा रहा है।

किसी ने बेचा अनाज, तो किसी ने गिरवी रखी जमीन

सरोदा गांव के सौखीराम बैगा और चोरभट्टी के सुखचंद बैगा की कहानी रोंगटे खड़े कर देने वाली है। इन दोनों आदिवासियों ने पुलिस के डर से अपने घर का सालभर का अनाज बेच दिया। ब्याज पर कर्ज लिया और अपनी खेती की जमीनें तक गिरवी रख दीं।

दोनों ने किसी तरह 25-25 हजार रुपए की रकम जुटाई और अधिकारियों के हाथ पर रख दी। लेकिन इतनी मोटी रकम लूटने के बाद भी अधिकारियों का कलेजा नहीं पसीजा और दोनों को जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिया गया।

बिना शराब पकड़े भी ऐंठ लिए 20 हजार

आबकारी विभाग की इस ज्यादती की फेहरिस्त लंबी है। चिखली गांव के राजू साहू के घर पर छापा मारा गया, लेकिन वहां एक बूंद शराब नहीं मिली।

बावजूद इसके SI गीता साहू ने उसे झूठे केस में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दी। डरा हुआ राजू कर्ज लेकर 20 हजार रुपए की घूस देने को मजबूर हो गया। वहीं, 10 जून 2026 को छेरकीकछार में महज 5 लीटर शराब को 10 लीटर बताकर फंसाए गए समरत बैगा खौफ के मारे आज भी घर से लापता हैं। उनका परिवार दाने-दाने को मोहताज है।

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निलंबन और SC/ST एक्ट की मांग

भोरमदेव इलाके के भोपचंद और शहरु बैगा से भी भारी दबाव बनाकर 15 और 10 हजार रुपए की अवैध वसूली की गई। इस पूरे खेल ने कई आदिवासी परिवारों को कर्ज के दलदल में धकेल दिया है और वे भूमिहीन होने की कगार पर हैं।

अब बैगा समाज ने कार्रवाई के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। बैगा समाज ने शासन से तत्काल दोनों एसआई को निलंबित कर उनके खिलाफ SC/ST एक्ट और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज करने की मांग की है।