रायपुर | शहर की बिजली व्यवस्था को सुचारू रखने वाले सबस्टेशनों के प्लेसमेंट कर्मचारी अब अपनी ही एजेंसी के खिलाफ लामबंद हो गए हैं। रायपुर के अलग-अलग विद्युत सबस्टेशनों में 500 से अधिक प्लेसमेंट कर्मचारी काम कर रहे हैं। इन कर्मचारियों ने प्लेसमेंट एजेंसी पर तय वेतन से कम राशि देने और पीएफ में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है। यह स्थिति कोई नई नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों से लगातार बनी हुई है। अपनी मांगों और ठेकेदार की कार्यप्रणाली को लेकर कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री, विभागीय मंत्री, बिजली कंपनी के प्रबंध निदेशक (एमडी) और रायपुर रीजन के अधीक्षण अभियंता को लिखित शिकायत भेजी है। कर्मचारियों ने प्रशासन को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है। यदि इस अवधि में ठेकेदार पर कार्रवाई नहीं होती है, तो सभी कर्मचारी काम बंद कर हड़ताल पर चले जाएंगे।

शिकायत के अनुसार, रायपुर में सबस्टेशनों के संचालन की जिम्मेदारी प्लेसमेंट एजेंसी यूनिक ट्रेडर्स के पास है। कर्मचारियों का आरोप है कि एजेंसी के संचालक मनोज ढोलकिया लगभग 15 वर्षों से ऑपरेटरों का आर्थिक रूप से शोषण कर रहे हैं। नियम के मुताबिक कर्मचारियों को कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार वेतन दिया जाना चाहिए, लेकिन उन्हें इससे कम राशि दी जा रही है। कर्मचारियों को आज तक वेतन पर्ची (पेमेंट स्लिप) नहीं दी गई है। वेतन पर्ची नहीं मिलने से कर्मचारियों को यह जानकारी नहीं मिल पाती कि उनके वेतन से किस मद में कितनी कटौती की जा रही है और उनका वास्तविक भुगतान कितना है।

ऑपरेटर विनय कुमार ने बताया कि जब कर्मचारियों ने अपना पीएफ विवरण जांचा, तो बड़ी अनियमितता सामने आई। एजेंसी की तरफ से पीएफ खातों में तीन से चार महीने तक लगातार राशि जमा की जाती है, फिर अचानक पांच-छह महीने तक कोई भी अंशदान जमा नहीं किया जाता। इसके बाद फिर एक महीने की राशि डाल दी जाती है। शिकायत यह भी है कि जो राशि खाते में जमा की जा रही है, वह निर्धारित मानक से कम है। अन्य वैधानिक कर्मचारी सुविधाएं भी पहुंच से दूर हैं।

टेंडर की शर्तों का भी एजेंसी पालन नहीं कर रही है। सबस्टेशन जैसे जोखिम वाले स्थानों पर काम करने वाले ऑपरेटरों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण (सेफ्टी इक्विपमेंट) देना अनिवार्य है, लेकिन एजेंसी ने उन्हें ये उपकरण भी मुहैया नहीं कराए हैं।

ऑनलाइन शिकायतों के बाद जांच के निर्देश

इस पूरे मामले में रायपुर सिटी सर्किल-1 के अधीक्षण अभियंता एम. विश्वकर्मा ने बताया कि ऑपरेटरों की ओर से ऑनलाइन शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इन शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए सभी संभागीय अफसरों को जांच के निर्देश दे दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि वे शिकायतों की जांच करें। जांच में यदि यह प्रमाणित होता है कि कर्मचारियों को पूरा वेतन नहीं दिया गया या पीएफ जमा करने में अनियमितता की गई है, तो ठेकेदार से राशि की रिकवरी की जाएगी। रिकवरी की गई राशि का भुगतान संबंधित कर्मचारियों को कराया जाएगा और दोषी पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार पर कार्रवाई होगी।