रायपुर के चंगोराभाठा इलाके से रसूख और दबंगई की बड़ी घटना सामने आई है। यहां बिजली विभाग की महिला जेई अंजली नामदेव तथा उनके सहयोगी कर्मचारी जगन मोहनराव को शुक्रवार की शाम पूर्व आईपीएस राजकुमार देवांगन ने अपने ऑफिस में बंधक बना लिया। ये दोनों बिजली कर्मचारी विभाग को मिली शिकायत के आधार पर वहां जांच करने पहुंचे थे। बिजली विभाग को यह शिकायत मिली थी कि इंद्रप्रस्थ कालोनी स्थित मकान में घरेलू कनेक्शन लिया गया है, लेकिन वहां से कमर्शियल तौर पर कंपनी का कामकाज चल रहा है। बंधक बनाए जाने के बाद डीडी नगर थाने की पुलिस ने मौके पर जाकर दोनों कर्मचारियों को छुड़ाया।

चंगोराभाठा के बिजली विभाग के डीसी सेंटर की टीम जब मौके पर पहुंची, तो मामला शिकायत के अनुरूप ही पाया गया। जेई अंजली नामदेव ने पूरा घटनाक्रम साझा करते हुए बताया कि वह अपने सहकर्मी जगन मोहनराव के साथ उस घर का मुआयना करने पहुंची थीं। वहां भीतर जाने पर उन्हें नीलम तिवारी नाम की महिला मिली। कागजातों की जांच में यह तथ्य सामने आया कि वहां मौजूद बिजली का कनेक्शन धनंजय शर्मा के नाम पर दर्ज है। मौके पर हुई चेकिंग में यह बात प्रमाणित हो गई कि वह कनेक्शन पूरी तरह से घरेलू है, परंतु उस जगह का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।

जिस जगह घरेलू कनेक्शन के जरिए बिजली उपयोग में लाई जा रही थी, वहां दरअसल छत्तीसगढ़ बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड के नाम से पूर्व आईपीएस राजकुमार देवांगन का ऑफिस चल रहा है। कार्रवाई के दौरान ही बिजली विभाग के इन दोनों कर्मचारियों को ऑफिस के भीतर बंधक बना लिया गया। खुद को कैद किए जाने के बाद महिला जेई अंजली नामदेव ने अपने विभाग के अधिकारियों को मोबाइल से सूचना दी।

कर्मचारियों को बंधक बनाए जाने की सूचना मिलते ही चंगोराभाठा के एई गुलाब साहू तथा रायपुर पश्चिमी संभाग के कार्यपालन अभियंता जीके बंजारे पुलिस बल को लेकर घटनास्थल पर पहुंचे। इसके पश्चात डीडी नगर पुलिस की टीम और बिजली विभाग के अधिकारियों ने शाम के समय उस ऑफिस में दबिश दी और अपने कर्मचारियों को वहां से सुरक्षित बाहर निकाला।

सरकारी कर्मचारियों को बंधक बनाने के मामले में अब पुलिस से एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। चंगोराभाठा के सहायक अभियंता ने डीडी नगर थाने में लिखित तौर पर पूरी शिकायत दे दी है। थाने में दिए गए पत्र में घटनाक्रम का पूरा विवरण देकर मामला दर्ज करने की मांग की गई है। दूसरी तरफ, जब पूर्व आईपीएस राजकुमार देवांगन से इस बारे में बात की गई, तो उन्होंने पूरे घटनाक्रम से अनभिज्ञता जताई। राजकुमार देवांगन ने कहा कि उन्हें इस घटना के विषय में कुछ भी मालूम नहीं है, क्योंकि घटना के वक्त वह वहां पर मौजूद ही नहीं थे।