रिटायरमेंट के बाद भी संविदा एमडी बने महेंद्र सवन्नी, तानाशाही रवैये से तंग अफसरों ने दिया अल्टीमेटम

छत्तीसगढ़ मंडी बोर्ड कार्यालय में प्रशासनिक नियमों से ज्यादा रसूख का सिक्का चलता है। हालात ऐसे हैं कि जिस प्रबंध संचालक (एमडी) के पद पर आईएएस (IAS), आईएफएस (IFS), आईआरएस (IRS) या फिर कृषि विभाग के अपर संचालक स्तर के अधिकारी को बैठना चाहिए, वहां गैर-राजपत्रित पृष्ठभूमि वाला अफसर बैठा हैं। हम बात कर रहे हैं महेंद्र सिंह सवन्नी की, जिन्होंने वर्ष 1985-86 में सचिव वर्ग ‘द’ से अपनी नौकरी शुरू की थी। जून 2024 में रिटायर होने के बावजूद उनकी कुर्सी की पकड़ ढीली नहीं पड़ी और वे संविदा एमडी के रूप में उसी कार्यालय में डटे हुए हैं।

पिछले 16 सालों का प्रशासनिक इतिहास खंगाला जाए, तो राज्य में चार कृषि मंत्री अपना कार्यकाल पूरा कर चुके हैं या बदल चुके हैं। इसी अवधि में 10 से 12 प्रबंध संचालकों का स्थानांतरण भी हो चुका है। मंत्री आते-जाते रहे, एमडी बदलते रहे, मगर सवन्नी की कुर्सी कुंडली मारे हुए सर्प की तरह अपनी जगह पर कायम रही। प्रशासनिक फेरबदल का उन पर कोई असर नहीं पड़ा।

रसूख के दम पर लांघी वरिष्ठता

आरोप है कि अपने तगड़े राजनीतिक संपर्कों के बलबूते उन्होंने प्रमोशन के सारे नियम-कायदे किनारे कर दिए। वे वरिष्ठता को नजरअंदाज करते हुए संयुक्त संचालक बने, फिर अपर संचालक की कुर्सी हासिल की और उसके बाद अतिरिक्त एमडी के पद तक जा पहुंचे। इस लंबे कार्यकाल के दौरान उनके खिलाफ कई बार शिकायतें की गईं, अधिकारियों ने पत्राचार भी किए, मगर सत्ता के गलियारों में उनकी पहुंच के चलते कभी कोई सूक्ष्म जांच नहीं हो सकी।

गाली-गलौज और तबादले की धमकियां

लगातार 16 सालों से चली आ रही इस मनमानी और तानाशाही के खिलाफ अब मंडी बोर्ड के भीतर ही बगावत का बिगुल बज चुका है। विभाग के संयुक्त संचालक, अपर संचालक और आम कर्मचारियों ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है। अपर संचालक (मंडी बोर्ड) कमलेश इक्का के नेतृत्व में अधिकारियों ने कृषि मंत्री को सामूहिक ज्ञापन सौंपकर अपनी नाराजगी जाहिर की है।

कर्मचारियों का आरोप है कि कार्यालय में यदि कोई उनके गलत फैसलों का विरोध करता है, तो उसके साथ गाली-गलौज की जाती है। इतना ही नहीं, विरोधियों को दूरदराज के क्षेत्रों में तबादला करने की धमकियां भी मिलती हैं। काम का माहौल पूरी तरह से खराब हो चुका है और अफसर मानसिक रूप से परेशान हैं।

नियुक्ति निरस्त नहीं हुई तो होगा उग्र आंदोलन

सालों से घुटन झेल रहे मंडी कर्मचारियों ने अब दो टूक अल्टीमेटम दे दिया है। ज्ञापन में मांग रखी गई है कि सवन्नी की संविदा नियुक्ति तुरंत निरस्त की जाए और एमडी के पद पर प्रशासनिक नियमों के अनुरूप योग्य अधिकारी की पदस्थापना हो। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो पूरा मंडी बोर्ड उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा। वर्तमान में कार्यालय का पूरा कामकाज इस विरोध की वजह से प्रभावित हो रहा है और कर्मचारियों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है।