
बिलासपुर/ मुंगेली: प्रशासनिक दावों की जमीनी हकीकत यह है कि स्कूल शिक्षा विभाग में दागदार साबित हो चुके व्यक्ति को शासन ने 7 साल बाद मुंगेली जिले का डीईओ बना दिया है। तत्कालीन बिल्हा बीईओ और राजेंद्र नगर स्कूल के प्राचार्य रहे एमएल पटेल की 55.43 लाख रुपए के स्वीपर मानदेय घोटाले में भूमिका प्रमाणित हो चुकी है। विभागीय जांच और निलंबन का सामना कर चुके इसी अधिकारी को अब पूरे जिले के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकारों की कमान सौंप दी गई है। जबकि, पटेल 8 महीने बाद रिटायर होने वाले हैं।
साल 2015 में इस घोटाले की शिकायत होने के बाद जांच कराई गई थी। जांच रिपोर्ट मिलने पर संयुक्त संचालक (जेडी) ने 13 जून 2019 को 743 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट अतिरिक्त कलेक्टर को सौंपी। इस रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा गया कि बिल्हा बीईओ कार्यालय में अंशकालीन सफाई कर्मचारियों के मानदेय भुगतान में सुनियोजित तरीके से सरकारी पैसों का गबन किया गया है। बीईओ एमएल पटेल, रिटायर्ड लेखापाल एके तिवारी, लिपिक सुनील यादव, सफाईकर्मी रमेश निर्मलकर और अनिल चौहान का भ्रष्टाचार इसमें प्रमाणित हुआ था। पटेल पर 55.43 लाख से अधिक के गबन में संलिप्तता प्रमाणित हुई थी। रिपोर्ट में अनुशंसा की गई थी कि इनके वेतन, रिटायरमेंट पर मिलने वाली पेंशन और जीपीएफ से सरकारी राशि की वसूली हो। लेकिन शासन ने कठोर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें जिले का डीईओ बना दिया। फाइल तैयार करने और चेक काटने में सहयोग देने वाले लिपिक सुनील यादव पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ऐसे खेला गया 55.43 लाख के गबन का खेल
जांच टीम की रिपोर्ट में घोटाले की कई पर्तें खोली गई हैं:
- मार्च 2015 से शुरुआत: कार्यालय में अंशकालीन स्वीपरों के भुगतान का प्रभार शिल्पा शर्मा और शांतिलाल साहू के पास था। लेखापाल के अवकाश पर जाने से लिपिक सुनील यादव को मार्च-अप्रैल 2015 में मदद के लिए लगाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, यहीं से स्वीपर मानदेय भुगतान में गड़बड़ियां शुरू हुईं, जो मार्च 2017 तक जारी रहीं।
- दोगुनी निकली गबन की राशि: बीईओ कार्यालय ने शुरुआत में 28 लाख 4 हजार 100 रुपए के गबन का दावा किया था। जब जांच टीम ने एसबीआई सरकंडा शाखा से बैंक स्टेटमेंट निकाला, तो दोनों सफाई कर्मियों के खातों में दो वर्ष के भीतर 55 लाख 43 हजार 730 रुपए जमा होना पाया गया। यह राशि और अधिक होने की आशंका थी।
- चेक में होती थी कूटरचना: सफाईकर्मियों के माध्यम से बैंक में चेक भेजे जाते थे। चेक में राशि लिखते समय जानबूझकर खाली जगह छोड़ी जाती थी, जहां बाद में अतिरिक्त अंक जोड़कर और कांट-छांट कर राशि बढ़ा ली जाती थी।
- फर्जी शालाओं के नाम से आहरण: संबंधित सफाईकर्मी सिंधी कॉलोनी स्कूल में पदस्थ थे, लेकिन बैंक विवरण सूची में उनका नाम बंधवापारा, इमलीपारा आदि अलग-अलग शालाओं में दर्शाकर लाखों रुपए निकाल लिए गए।
- बिजली बिल बाउंस होने से खुला राज: कार्यालय से छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल बिल्हा को जारी 2 लाख 45 हजार 720 रुपए का चेक, खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण बाउंस हो गया। इसके बाद ही पूरे वित्तीय फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ।
मुझ पर गबन सिद्ध नहीं हुआ- एमएल पटेल
प्रभारी डीईओ मुंगेली, एमएल पटेल का कहना है कि जांच रिपोर्ट में उन पर गबन सिद्ध होना नहीं लिखा गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि असावधानी बरती गई है और विभाग प्रमुख होने के नाते ध्यान नहीं दिया गया, जिससे शासन को क्षति हुई। उनके खिलाफ विभागीय जांच हुई थी, जिसमें वेतन से राशि की कटौती की जा रही है। उन्होंने राज्यपाल को अभ्यावेदन भी प्रस्तुत किया था और वर्तमान में केवल शासन के निर्देशों का पालन कर रहे हैं।
