
बिलासपुर | लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) डिवीजन-1 में निर्माण कार्यों के नाम पर सरकारी पैसे की बंदरबांट का बड़ा मामला सामने आया है। यहां अफसरों ने मिलीभगत कर सड़क निर्माण में ठेकेदार को 1.60 करोड़ रुपए का अनुचित लाभ पहुंचा दिया। इसके लिए न तो टेंडर की शर्तों का पालन किया गया और न ही रॉयल्टी व डीएमएफ की राशि काटी गई। महालेखाकार की 2025-26 की ऑडिट रिपोर्ट में इस पूरी गड़बड़ी की पोल खुली है। इसके बावजूद अब तक किसी भी दोषी अफसर पर कार्रवाई नहीं हुई है, विभाग ने केवल ठेकेदार को नोटिस थमा कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली है।
यह पूरा मामला परसदा-बोदरी के बीच बनी 3.7 किलोमीटर लंबी सड़क से संबंधित है। इस सड़क के निर्माण का ठेका अनिल बिल्डकॉन ने लिया था। ठेकेदार ने 10.02 प्रतिशत न्यूनतम दर पर कुल 5.62 करोड़ रुपए में यह काम लिया था। लेकिन काम शुरू होने के बाद विभाग के अधिकारियों ने ठेकेदार पर जमकर मेहरबानी दिखाई।
ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए कई स्तर पर नियम तोड़े। 13 अक्टूबर 2023 को ठेकेदार को 24 लाख रुपए का मूल्य वृद्धि (एस्केलेशन) भुगतान कर दिया गया। इसके लिए अधिकारियों ने जून 2022 के सही इंडेक्स आंकड़ों का उपयोग ही नहीं किया। इतना ही नहीं, मार्च से मई 2023 के बीच लेबर और निर्माण सामग्री के रेट में हेरफेर करके ठेकेदार को 16 लाख रुपए का अतिरिक्त भुगतान कर दिया गया। पांचवें और आखिरी बिल में अधिकारियों ने उन मदों का भी पैसा जारी कर दिया, जो मूल टेंडर में शामिल ही नहीं थे। बिना किसी संशोधित तकनीकी स्वीकृति के, अधिक काम दिखाकर 1.02 करोड़ रुपए का भुगतान ठेकेदार को कर दिया गया।
खनिज मद में भी बड़ी धांधली पकड़ी गई है। जांच में सामने आया कि सड़क बनाने में उपयोग किए गए मेटल और रेत की रॉयल्टी व डीएमएफ के नाम पर ठेकेदार के बिल से सिर्फ 22.90 लाख रुपए ही काटे गए। नियमों के मुताबिक, उपयोग किए गए खनिज की मात्रा के आधार पर बाजार दर से रॉयल्टी और रॉयल्टी का 30 प्रतिशत डीएमएफ के रूप में काटा जाना था। अंतिम बिल का भुगतान रॉयल्टी चुकता प्रमाण पत्र मिलने के बाद ही किया जाना था, लेकिन अधिकारियों ने ऐसा नहीं किया। बाजार मूल्य से कटौती न करने के कारण बिल से 41.73 लाख रुपए कम काटे गए। ठेकेदार द्वारा चुकता प्रमाण पत्र न देने के बाद भी खनिज मद में यह राशि जमा नहीं कराई गई। इस पूरे प्रकरण में पीडब्ल्यूडी मामले की जांच कराने की बात कहा रहा है।