भोपाल। मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत ‘निरामयम्’ योजना के तहत मरीजों के इलाज से जुड़े रिकॉर्ड में कथित लापरवाही सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। योजना के तहत उपचार किए जाने के बावजूद संबंधित प्रकरण TMS पोर्टल पर दर्ज नहीं करने के मामले में प्रदेश के 11 अस्पतालों को नोटिस जारी किए गए हैं। सभी संबंधित अस्पतालों से सात दिन के भीतर स्पष्ट और संतोषजनक जवाब मांगा गया है।

अधिकारियों के मुताबिक, पिछले छह महीनों के उपलब्ध आंकड़ों की समीक्षा के दौरान इन अस्पतालों की कार्यप्रणाली में ऐसी विसंगतियां सामने आईं। इसके बाद योजना के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अरविंद शाह ने संबंधित संस्थानों से तथ्यात्मक स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने को कहा है।

11 अस्पतालों पर कार्रवाई की तलवार
नोटिस पाने वाले अस्पताल मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों में स्थित हैं। इनमें बड़वानी का मनोरमा हॉस्पिटल, भोपाल के गणपति हॉस्पिटल, हक मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नवोदय हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर और शल्य ज्वाइंट केयर, ग्वालियर का मेट्रो न्यूरो हॉस्पिटल, इंदौर का आर्थ्रोस क्लिनिक, नीमच का रामनिवास ऐरन हॉस्पिटल, रीवा का रेवांचल हेल्थ केयर एंड नर्सिंग होम, शाजापुर का श्री डीपी केयर हॉस्पिटल और टीकमगढ़ का न्यू सिटी हॉस्पिटल शामिल हैं।

छह महीने के रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद सामने आया मामला
बताया गया है कि योजना के तहत अस्पतालों की कार्यप्रणाली और उपचार संबंधी आंकड़ों का पिछले छह महीनों के दौरान विश्लेषण किया गया। इसी प्रक्रिया में कुछ अस्पतालों द्वारा उपचार से संबंधित मामलों को TMS पोर्टल पर दर्ज नहीं किए जाने की स्थिति सामने आई। TMS पोर्टल पर मरीजों के उपचार संबंधी जानकारी दर्ज करना आयुष्मान योजना की निगरानी और रिकॉर्ड व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी वजह से रिकॉर्ड में कथित कमी को विभाग ने गंभीरता से लिया है।

सात दिन में देना होगा जवाब
नोटिस जारी होने के बाद अब संबंधित अस्पतालों के पास अपना पक्ष रखने के लिए सात दिन का समय है। विभाग ने अस्पतालों से महज औपचारिक जवाब देने के बजाय मामले से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर संतोषजनक स्पष्टीकरण देने को कहा है। यदि निर्धारित अवधि में जवाब नहीं दिया जाता है या अस्पताल की ओर से दिया गया स्पष्टीकरण अधिकारियों को संतोषजनक नहीं लगता, तो संबंधित अस्पताल के खिलाफ डी-इम्पैनलमेंट जैसी कार्रवाई की जा सकती है।

मरीजों के अधिकारों पर विभाग का फोकस
आयुष्मान भारत योजना के जरिए बड़ी संख्या में जरूरतमंद मरीजों को सूचीबद्ध अस्पतालों में उपचार की सुविधा मिलती है। ऐसे में योजना के तहत इलाज से जुड़े रिकॉर्ड और प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी माना जाता है। अधिकारियों का कहना है कि योजना के हितग्राहियों के उपचार से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। अस्पतालों की जवाबदेही तय करने के साथ-साथ इस कार्रवाई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र मरीजों को योजना का लाभ निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मिलता रहे। फिलहाल, 11 अस्पतालों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है। आगे की कार्रवाई उनके जवाब और विभागीय जांच के निष्कर्षों के आधार पर तय होगी।