रायपुर। राजधानी रायपुर के देवेंद्र नगर स्थित Axis Bank में बैंकिंग व्यवस्था के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। बैंक प्रबंधन की शिकायत पर पुलिस ने अपने ही डिप्टी मैनेजर और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ ग्राहक के खाते से रकम कथित तौर पर दूसरे खाते में ट्रांसफर करने के मामले में केस दर्ज किया है। आरोप है कि ग्राहक के खाते में दर्ज मोबाइल नंबर को बदलने के बाद उसके फिक्स्ड डिपॉजिट और खाते की रकम दूसरे खाते में भेजी गई। मामले में बैंक मैनेजर रितेंद्र रामटेके की शिकायत पर डिप्टी मैनेजर कुलदीप सिंह और योगेश येडे के खिलाफ गंज थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है।

फर्जी कस्टमर रिक्वेस्ट के जरिए बदला मोबाइल नंबर
बैंक मैनेजर की शिकायत के अनुसार, डिप्टी मैनेजर पर आरोप है कि उसने ग्राहक सुषमा कुमार के बैंक खाते में दर्ज मोबाइल नंबर को कथित तौर पर एक फर्जी कस्टमर रिक्वेस्ट फॉर्म के जरिए बदल दिया। मोबाइल नंबर बदलने के बाद खाते से जुड़े डिजिटल बैंकिंग एक्सेस का इस्तेमाल कर रकम ट्रांसफर किए जाने का आरोप है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरी प्रक्रिया में बैंक के अंदर से किन स्तरों पर मदद मिली और कौन-कौन से सिस्टम या दस्तावेज इस्तेमाल किए गए।

FD तोड़ी, फिर दूसरे खाते में पहुंची रकम
शिकायत के मुताबिक, ग्राहक के खाते में मौजूद फिक्स्ड डिपॉजिट की करीब 14.40 लाख रुपये की राशि को कथित तौर पर दूसरे बैंक खाते में ट्रांसफर किया गया।बताया गया है कि रकम ‘इंडियन सेल्स’ नामक खाते में पहुंची, जिसके प्रोपराइटर के तौर पर योगेश येडे का नाम सामने आया है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि ट्रांसफर की गई रकम को बाद में चेक और एटीएम के माध्यम से निकाला गया। बैंक प्रबंधन ने जांच के दौरान लेन-देन के रिकॉर्ड खंगाले, जिसके बाद डिप्टी मैनेजर की भूमिका संदिग्ध पाए जाने का दावा किया गया।

ग्राहक को 7 जुलाई को हुआ रकम गायब होने का पता
बताया गया कि सुषमा कुमार को 7 जुलाई को अपने खाते और FD से संबंधित रकम के दूसरे खाते में जाने की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने बैंक प्रबंधन से शिकायत की। शिकायत मिलने पर बैंक ने आंतरिक स्तर पर लेन-देन और खाते से जुड़े रिकॉर्ड की जांच शुरू की। जांच में रकम के दूसरे खाते में ट्रांसफर होने की जानकारी सामने आने के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।

एक खाते से दूसरे खाते तक पहुंची रकम, अब पुलिस जांच
बैंक की शिकायत में करीब 15 लाख रुपये की कथित हेराफेरी का उल्लेख किया गया है। हालांकि, शिकायत में इससे अधिक राशि से जुड़े लेन-देन का भी जिक्र है, इसलिए पुलिस पूरे वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रही है। जांच का फोकस इस बात पर है कि ग्राहक के मोबाइल नंबर में बदलाव किस प्रक्रिया के तहत किया गया, फर्जी फॉर्म कैसे तैयार हुआ, डिजिटल बैंकिंग का इस्तेमाल किसने किया और ट्रांसफर के बाद रकम कहां-कहां निकाली गई।

डिप्टी मैनेजर पर ही क्यों आया शक?
बैंक प्रबंधन की आंतरिक जांच के दौरान ग्राहक के खाते में हुए बदलाव और रकम के ट्रांसफर से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले गए। इसी प्रक्रिया में डिप्टी मैनेजर कुलदीप सिंह की कथित भूमिका सामने आने का दावा किया गया। इसके बाद बैंक मैनेजर ने कुलदीप सिंह और योगेश येडे के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

अब पुलिस खंगालेगी बैंकिंग ट्रेल
मामला सामने आने के बाद पुलिस के सामने अब कई अहम सवाल हैं, मोबाइल नंबर बदलने के लिए किस स्तर पर अनुमति ली गई? ग्राहक की पहचान और दस्तावेजों का इस्तेमाल कैसे हुआ? रकम ट्रांसफर करने के बाद उसे किन माध्यमों से निकाला गया? और क्या इस पूरी प्रक्रिया में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था? पुलिस अब बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रांजैक्शन, संबंधित दस्तावेज और निकासी के माध्यमों की जांच के जरिए पूरे मामले की कड़ी जोड़ने में जुटी है। बैंक के अंदर से ग्राहक के खाते तक पहुंच और फिर रकम के ट्रांसफर के आरोप ने इस मामले को गंभीर बना दिया है। अब जांच से यह साफ होगा कि कथित गड़बड़ी कैसे अंजाम दी गई और इसमें कितने लोग शामिल थे।