प्रतापपुर। सूरजपुर जिले के प्रतापपुर विकासखंड में तेज बारिश ने एक बड़े निर्माण की पोल खोल दी। ग्राम धोंधा में नदी पर बना करीब 10 करोड़ रुपये की लागत वाला पुल रातभर हुई बारिश के बाद ढह गया। पुल के बह जाने से आसपास के दर्जनों गांवों के हजारों ग्रामीणों के सामने आवागमन का संकट खड़ा हो गया है। बताया जा रहा है कि पुल की हालत पहले से ही खराब थी और उसके ढांचे में दरारें भी नजर आने लगी थीं। इसके बावजूद समय रहते जरूरी मरम्मत नहीं होने का आरोप ग्रामीण लगा रहे हैं।

सुबह नदी में दिखाई दिया टूटा पुल
गुरुवार रात इलाके में लगातार बारिश हुई। बारिश थमने के बाद जब ग्रामीण सुबह नदी की ओर पहुंचे तो पुल का बड़ा हिस्सा पानी में समाया नजर आया। जिस पुल से रोजाना आसपास के गांवों के लोग आवागमन करते थे, वह अब पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। पुल के टूटने की खबर फैलते ही इलाके में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों के लिए यह सिर्फ एक पुल का टूटना नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी और जरूरी सेवाओं से जुड़ा बड़ा संकट बन गया है।

हजारों लोगों के सामने रास्ते का संकट
धोंधा का यह पुल आसपास के कई गांवों को जोड़ने वाले प्रमुख मार्ग का हिस्सा था। पुल के क्षतिग्रस्त होने से दर्जनों गांवों के हजारों लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि अब नदी के दूसरी ओर जाने के लिए उन्हें वैकल्पिक और लंबा रास्ता अपनाना पड़ेगा। स्कूल, अस्पताल, बाजार और अन्य जरूरी कामों के लिए आने-जाने वाले लोगों की परेशानी बारिश के मौसम में और बढ़ सकती है।

पहले से दिख रही थीं दरारें?
स्थानीय लोगों के मुताबिक पुल की स्थिति पहले से ही चिंताजनक थी। पुल के हिस्सों में दरारें आने की बात भी सामने आई थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर ढांचे में कमजोरी पहले से दिखाई दे रही थी तो उसकी समय पर मरम्मत क्यों नहीं कराई गई? करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से बने पुल के बारिश में बह जाने के बाद अब निर्माण की गुणवत्ता, रखरखाव और जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश
पुल टूटने की जानकारी प्रशासन तक पहुंचने के बाद सूरजपुर कलेक्टर रेना जमील ने मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने संबंधित विभाग को पूरे मामले की जांच करने और लापरवाही सामने आने पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अब जांच के जरिए यह स्पष्ट होगा कि पुल के क्षतिग्रस्त होने की असली वजह क्या थी,अत्यधिक बारिश और नदी का तेज बहाव, निर्माण में तकनीकी खामी या समय पर रखरखाव नहीं होना।

करोड़ों की लागत, फिर भी नहीं टिक पाया पुल
इस घटना ने सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और उनके रखरखाव पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। 10 करोड़ रुपये की लागत से तैयार पुल का इस तरह बह जाना स्थानीय लोगों के लिए चिंता के साथ-साथ जांच का बड़ा विषय भी बन गया है। फिलहाल, ग्रामीणों को सबसे ज्यादा चिंता इस बात की है कि बारिश के इस मौसम में अब सुरक्षित आवाजाही कैसे होगी और पुल का वैकल्पिक इंतजाम कब तक किया जाएगा।