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भिलाई/दुर्ग। भिलाई स्टील प्लांट में स्क्रैप और लोहे की चोरी का बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है। प्रबंधन की तमाम सख्ती और हाईटेक निगरानी के बाद भी माफिया बेखौफ हैं। प्लांट के अंदर से हर दिन अवैध तरीके से कीमती लोहा और स्क्रैप बाहर निकाला जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सुरक्षा के लिए लगाए गए जीपीएस सिस्टम को भी चोरी के लिए बड़ी आसानी से चकमा दिया जा रहा है।
क्राइम के तरीके की बात करें तो माफिया बहुत शातिर ढंग से काम कर रहे हैं। प्लांट के अंदर ठेका एजेंसियों के ट्रकों से पहले जीपीएस डिवाइस निकाल लिया जाता है। इसके बाद रात के अंधेरे में ट्रकों में कीमती लोहा भरा जाता है। चोरी का माल लोड होने के बाद सुबह वही जीपीएस वापस ट्रकों में लगा दिया जाता है ताकि सुरक्षा एजेंसियों को लगे कि गाड़ी अपनी तय जगह पर ही खड़ी थी।
लगातार हो रही इस चोरी पर पर्दा डालने की कोशिशें अब नाकाम हो चुकी हैं। बीएसपी प्रबंधन ने कागजी कार्रवाई करते हुए अब तक करीब 120 ट्रकों को ब्लैकलिस्ट किया है। इन गाड़ियों की जब जांच हुई तो पता चला कि इनमें कांटा घर में वजन की हेराफेरी की जाती थी। कई ट्रकों में तो चोरी का लोहा छिपाने के लिए खास तरह के गुप्त केबिन तक बनाए गए थे। इतनी बड़ी संख्या में ट्रकों पर बैन लगने के बाद भी अवैध निकासी का खेल पूरी तरह से बंद नहीं हो पाया है।
ठेका एजेंसियों के वाहनों पर लागू जीपीएस निगरानी सिस्टम अब पूरी तरह सवालों के घेरे में है। सिस्टम की नाकामी और प्लांट को हो रहे भारी आर्थिक नुकसान की गूंज अब सीधे दिल्ली तक पहुंच गई है। बीते 27 जनवरी 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस पूरे भ्रष्टाचार की विस्तृत शिकायत भेजी गई है। इस शिकायत में एलडी स्लैग की टेंडर प्रक्रिया और ट्रकों के जरिए हो रही अवैध निकासी की उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है।
यह पहला मौका नहीं है जब मामले की शिकायत दिल्ली तक गई है। इससे पहले 14 नवंबर 2024 को भी एक जनप्रतिनिधि ने केंद्रीय इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी को पूरे मामले की जानकारी दी थी। मंत्री को भेजी गई शिकायत में बीएसपी में चल रहे भ्रष्टाचार और स्क्रैप चोरी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था। शिकायत में साफ तौर पर बताया गया था कि एलडी स्लैग के टेंडर और निकासी में बड़ी धांधली हो रही है जिससे सरकारी खजाने और संयंत्र को सीधा आर्थिक नुकसान हो रहा है।
जमीनी हकीकत यह है कि बीएसपी प्रबंधन के दावों और कागजी कार्रवाई के बीच स्क्रैप माफिया का नेटवर्क आज भी मजबूत है। गाड़ियों में फर्जीवाड़ा कर लोहा लगातार प्लांट से बाहर भेजा जा रहा है। अब हर किसी की नजर इस बात पर है कि पीएमओ और केंद्रीय इस्पात मंत्रालय के दखल के बाद इस बड़े गोलमाल में शामिल लोगों पर कब और क्या ठोस कार्रवाई होती है।