कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सियासत में विधानसभा चुनावी झटके के बाद अब तृणमूल कांग्रेस के भीतर बड़े राजनीतिक संकट की चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा गर्म है कि लोकसभा में टीएमसी के कई सांसद भाजपा के संपर्क में हैं और आने वाले दिनों में पार्टी में बड़ी टूट देखने को मिल सकती है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ सांसद नेतृत्व शैली और संगठनात्मक फैसलों से नाराज बताए जा रहे हैं, जिससे पार्टी के अंदर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है।

सूत्रों का दावा है कि लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के करीब एक दर्जन सांसद भाजपा के साथ जाने या समर्थन देने की रणनीति पर विचार कर रहे हैं। वहीं कुछ अन्य सांसदों से भी लगातार संपर्क साधा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह घटनाक्रम आगे बढ़ता है तो यह सिर्फ दल-बदल नहीं बल्कि बंगाल की राजनीति में शक्ति संतुलन बदलने वाला बड़ा घटनाक्रम साबित हो सकता है।

बताया जा रहा है कि दल-बदल कानून से बचने के लिए एक बड़े समूह को एकसाथ लाने की रणनीति तैयार की जा रही है। इस संभावित घटनाक्रम की खबर मिलते ही तृणमूल नेतृत्व भी सक्रिय हो गया है और पार्टी को एकजुट रखने के लिए अंदरूनी स्तर पर लगातार बैठकें और संवाद किए जा रहे हैं। चर्चा यह भी है कि पार्टी के कुछ प्रभावशाली चेहरे और शीर्ष नेतृत्व के करीबी माने जाने वाले सांसद भी इस राजनीतिक हलचल के केंद्र में हैं।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि तृणमूल कांग्रेस के सांसदों का बड़ा समूह भाजपा के साथ आता है तो इसका असर केवल बंगाल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी समीकरण बदल सकते हैं। लोकसभा के साथ-साथ राज्यसभा में भी भाजपा की नजर टीएमसी सांसदों पर बताई जा रही है। हालांकि इन तमाम अटकलों और दावों पर अब तक किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन बंगाल की राजनीति में बढ़ती हलचल ने सियासी तापमान जरूर बढ़ा दिया है।