मुंबई। महाराष्ट्र में लगातार हो रही भारी बारिश ने कई इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। नदियां उफान पर हैं, सड़कें जलमग्न हो चुकी हैं और कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट गया है। ऐसे ही हालात पालघर जिले में देखने को मिले, जहां एक गर्भवती महिला को समय पर अस्पताल पहुंचाना परिवार और ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन गया। जब एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी, तब ग्रामीणों और आशा कार्यकर्ता ने लकड़ी के दरवाजे को अस्थायी स्ट्रेचर बनाकर महिला को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया।

बाढ़ में घिरा गांव, सड़कें हुईं बंद
जानकारी के अनुसार, पालघर जिले के हनुमानपाड़ा गांव निवासी प्रियंका यादव को 7 जुलाई को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। लगातार बारिश के कारण गांव की सड़कें पानी में डूब चुकी थीं और आसपास का संपर्क पूरी तरह बाधित हो गया था। ऐसे में एंबुलेंस भी गांव तक नहीं पहुंच सकी। परिजनों को चिंता थी कि अगर समय रहते अस्पताल नहीं पहुंचाया गया तो मां और गर्भस्थ शिशु दोनों की जान खतरे में पड़ सकती है।

दरवाजे को बनाया स्ट्रेचर
आपात स्थिति को देखते हुए आशा कार्यकर्ता दिव्या घरात ने ग्रामीणों की मदद से एक लकड़ी का दरवाजा उतारा और उसे अस्थायी स्ट्रेचर की तरह इस्तेमाल किया। प्रियंका को उस पर लिटाकर ग्रामीण बाढ़ के पानी से होकर पैदल निकले और सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया, जहां से उन्हें अस्पताल ले जाया गया। दिव्या घरात ने बताया कि हालात बेहद चुनौतीपूर्ण थे, लेकिन समय गंवाना संभव नहीं था। इसलिए उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए तुरंत निर्णय लिया गया।

सुरक्षित हुआ प्रसव
ग्रामीणों, आशा कार्यकर्ता और स्वास्थ्य विभाग की तत्परता के चलते प्रियंका यादव को समय पर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उन्होंने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया। मेडिकल ऑफिसर डॉ. शुभांगी सानप ने बताया कि मां और नवजात दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। यह घटना आपदा के समय सामुदायिक सहयोग, त्वरित निर्णय और स्वास्थ्यकर्मियों की जिम्मेदारी का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है।