
बिलासपुर। राजस्व अधिकारियों की लेटलतीफी और काम अटकाने की आदत पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने तहसीलदार बिलासपुर को कड़ा निर्देश दिया है कि लंबित सीमांकन आवेदनों का निपटारा हर हाल में 15 दिनों के भीतर किया जाए।
हाईकोर्ट के इस अहम फैसले के बाद बिलासपुर प्रेस क्लब की जमीन के सीमांकन का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है। कोर्ट के कड़े निर्देश के बाद अब सीमांकन के मामलों में किसी भी तरह की बेबुनियाद आपत्ति या विभागीय बहानेबाजी काम नहीं आएगी।
राजस्व विभाग के दफ्तरों में सीमांकन के नाम पर होने वाली देरी आम जनता के लिए बड़ी परेशानी का सबब है। इसी लालफीताशाही से तंग आकर मंगला इलाके की रहने वाली सरोज वाजपेयी ने न्याय के लिए सीधे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अपनी निजी जमीन खसरा नंबर 968 रकबा 0.0310 हेक्टेयर पर निर्माण कार्य के लिए सीमांकन कराने 27 फरवरी 2026 को बिलासपुर के अतिरिक्त तहसीलदार के पास आवेदन लगाया था। आवेदन देने के करीब तीन महीने बीत जाने के बाद भी राजस्व अधिकारियों ने फाइल आगे नहीं बढ़ाई और कोई जमीनी कार्रवाई नहीं की।
याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में मजबूती से तर्क रखा कि अब जल्द ही बारिश का मौसम शुरू होने वाला है। अगर समय रहते सीमांकन का काम पूरा नहीं हुआ तो जमीन पर निर्माण कार्य पूरी तरह से बाधित हो जाएगा। इससे याचिकाकर्ता को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। कोर्ट को यह भी बताया गया कि राजस्व नियमों के तहत सीमांकन आवेदन पर तय समय में कार्रवाई करना अधिकारियों की कानूनी जिम्मेदारी है जिससे वे बच नहीं सकते।
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य शासन का रुख भी सकारात्मक रहा। सरकार की तरफ से पैनल अधिवक्ता अमित नायक ने कोर्ट में कहा कि लंबित आवेदन पर अगर अदालत कोई समय सीमा तय करती है तो शासन को इसमें कोई ऐतराज नहीं है।
हालात की गंभीरता और बारिश से होने वाले नुकसान को देखते हुए हाईकोर्ट ने तहसीलदार को सख्त निर्देश जारी किए। कोर्ट ने साफ कहा कि सभी प्रभावित जमीन मालिकों को तुरंत नोटिस जारी किया जाए और अदालत के आदेश की प्रमाणित कॉपी मिलने के ठीक 15 दिनों के भीतर सीमांकन की पूरी प्रक्रिया नियम के अनुसार खत्म की जाए।
हाईकोर्ट का यह फैसला बिलासपुर में रुके हुए कई अन्य सीमांकन मामलों के लिए एक बड़ी नजीर बन गया है। इस आदेश का सबसे बड़ा और सीधा असर बिलासपुर प्रेस क्लब की बहुप्रतीक्षित जमीन के सीमांकन पर पड़ेगा। अब तक जो मामले बेवजह की आपत्तियों और विभागीय सुस्ती के कारण अटके हुए थे वे अब तेजी से सुलझेंगे।
कोर्ट के इस स्पष्ट निर्देश के बाद राजस्व अमले को तय समय में काम करना ही होगा और कोई भी व्यक्ति या संस्था आपत्ति लगाकर प्रेस क्लब के सीमांकन की राह में रोड़ा नहीं बन सकेगी। प्रशासन को अब हर हाल में समय पर अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।