रायपुर | जल संसाधन विभाग में चहेते निविदाकारों को ठेका दिलाने के लिए मापदंड बदलने के बाद अब चालू निर्माण कार्यों के आबंटन पर रोक लगा दी गई है। शासन की तय नीति के अनुसार हर तिमाही के पहले सप्ताह में राशि जारी करना अनिवार्य है। इसके उलट अक्टूबर का पहला पखवाड़ा बीतने को है, लेकिन तृतीय तिमाही का आबंटन जारी नहीं हुआ। मैदानी दफ्तरों से लेकर मंत्रालय तक चर्चा है कि जब तक 3 से 4 प्रतिशत का चढ़ावा तय नहीं होता, तब तक आबंटन की फाइलें आगे नहीं बढ़ेंगी। वर्तमान प्रभारी प्रमुख अभियंता नेताम के कार्यकाल में सक्रिय हुए दलाल इस वसूली के लिए जिलों के ठेकेदारों पर दबाव बना रहे हैं।

नियम दरकिनार, अक्टूबर की किश्त दबाई

विभाग में निर्माण कार्यों के नियमित भुगतान के लिए शासन ने स्पष्ट समय-सारिणी तय कर रखी है:

 प्रथम तिमाही: अप्रैल के प्रथम सप्ताह में आबंटन जारी करने का प्रावधान।

द्वितीय तिमाही: जुलाई के प्रथम सप्ताह में अनिवार्य रूप से राशि देना।

तृतीय तिमाही: अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में आबंटन जारी करना।

चतुर्थ तिमाही: जनवरी के प्रथम सप्ताह में अंतिम किश्त का निपटारा।

इस तय कैलेंडर का पालन करने के बजाय विभाग ने तीसरी तिमाही की फाइलें रोक ली हैं। फील्ड में काम कर रहे ठेकेदार भुगतान के लिए राजधानी के चक्कर काट रहे हैं।

पूरे प्रदेश में फैला नेटवर्क: कहां-कहां फंसा भुगतान और काम

यह व्यवस्था सिर्फ मुख्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के अलग-अलग संभागों में चल रही परियोजनाओं पर इसका असर दिख रहा है:

 बिलासपुर संभाग (अरपा-भैंसाझार व मनियारी वृत्त): कोटा और तखतपुर क्षेत्र में नहर विस्तार और लाइनिंग कार्यों के देयक लंबे समय से अटके हैं। आबंटन सूची में नाम जुड़वाने के लिए दलालों द्वारा तय प्रतिशत की मांग की जा रही है।

जांजगीर-चांपा व रायगढ़ (हसदेव बांगो व केलो परियोजना)

हसदेव बांगो की वितरिकाओं और केलो परियोजना के तहत चल रहे पक्के निर्माण कार्यों का बजट रोक दिया गया है। भुगतान न मिलने से एजेंसियों ने साइट पर काम की गति धीमी कर दी है।

 दुर्ग-रायपुर संभाग :तांदुला नहर व शिवनाथ बैराज

एनीकट और तटबंध सुधार कार्यों में पहले निविदा शर्तों में बदलाव कर काम बांटे गए। अब जब रनिंग बिलों के भुगतान का समय आया, तो आबंटन में 40 से 50 प्रतिशत तक की कटौती की जा रही है।

बस्तर व सरगुजा अंचल (लघु सिंचाई व स्टॉपडैम):

जगदलपुर, कांकेर, अंबिकापुर और सूरजपुर के वनांचल में चल रहे चेकडैम और व्यपवर्तन योजनाओं के लिए राशि जारी नहीं की जा रही। स्थानीय ठेकेदार भुगतान की गुहार लेकर रायपुर के चक्कर लगा रहे हैं।

कमीशन न देने पर बजट में कटौती

मुख्यालय में सक्रिय बिचौलियों का तंत्र हर वृत्त और संभाग से आने वाले बिलों की छंटनी कर रहा है। जिन ठेकेदारों ने 3 से 4 प्रतिशत चढ़ावे पर सहमति नहीं दी, उनके आबंटन में भारी कटौती कर दी गई। वहीं शर्तें मानने वालों के आबंटन आदेश प्राथमिकता पर निकाले जा रहे हैं। इस गतिरोध के चलते निर्माण स्थलों पर मजदूरों की मजदूरी और निर्माण सामग्री की आपूर्ति रुक गई है। आने वाले रबी सीजन के लिए नहरों की मरम्मत का जो काम समय पर पूरा होना था, वह अब अधर में लटक गया है।