रायपुर: रायपुर जिला न्यायालय परिसर में कथित फर्जी वकील की गिरफ्तारी ने न्यायिक व्यवस्था की सुरक्षा और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस जगह आम लोग न्याय की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वहीं अगर कोई व्यक्ति वकील बनकर खुलेआम घूमता रहे और लोगों से संपर्क करता रहे, तो यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की बड़ी चूक माना जा सकता है। प्रारंभिक जांच में कई संदिग्ध दस्तावेज मिलने के बाद इस मामले ने और गंभीर रूप ले लिया है।

जानकारी के अनुसार आरोपी लंबे समय से खुद को अधिवक्ता बताकर लोगों से संपर्क कर रहा था। उसकी गतिविधियों पर संदेह तब गहराया जब पूछताछ के दौरान वह बार-बार अपनी पहचान बदलने लगा। कभी एक नाम तो कभी दूसरा नाम बताने से अधिवक्ताओं को उसके फर्जीवाड़े की आशंका हुई। यदि बार एसोसिएशन के पदाधिकारी सतर्कता नहीं दिखाते, तो यह कथित जालसाज और अधिक लोगों को अपने झांसे में ले सकता था।r1j7bz_1782017558

तलाशी के दौरान आरोपी के पास से कई आधार कार्ड और अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज बरामद हुए हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि मामला सिर्फ फर्जी वकालत तक सीमित नहीं, बल्कि पहचान पत्रों के दुरुपयोग और संभावित ठगी के बड़े नेटवर्क से भी जुड़ा हो सकता है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया जा रहा था और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि पुलिस को इस मामले में एक संगठित गिरोह के सक्रिय होने की आशंका है और पांच अन्य संदिग्ध सदस्य अभी फरार बताए जा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि यह नेटवर्क लंबे समय से कोर्ट परिसर के आसपास सक्रिय था, तो इसकी भनक पहले क्यों नहीं लगी। जांच एजेंसियों के सामने अब केवल आरोपी को सजा दिलाने की चुनौती नहीं, बल्कि पूरे गिरोह का पर्दाफाश कर न्याय व्यवस्था में लोगों का भरोसा कायम रखने की जिम्मेदारी भी है।r1j7bz_1782017558

फिलहाल, पुलिस आरोपी से पूछताछ कर उसके नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। आने वाले दिनों में जांच से यह साफ होगा कि यह फर्जीवाड़ा कितने समय से चल रहा था, कितने लोग इसके शिकार बने और क्या कोर्ट परिसर के भीतर या बाहर किसी अन्य व्यक्ति की भी इसमें भूमिका रही है। यह मामला एक बार फिर बताता है कि सतर्कता में छोटी सी चूक भी बड़े अपराधों को जन्म दे सकती है।