जिला न्यायालय ने सिविल लाइन पुलिस को दिए 7 दिन के भीतर एफआईआर दर्ज करने के सख्त निर्देश।

लापरवाही पर भड़के जज: तय तारीख पर कोर्ट नहीं पहुंचने पर थाना प्रभारी को कारण बताओ नोटिस, अवमानना की चेतावनी।

 

करोड़ों का खेल: फर्जी दस्तावेज और पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए कीमती नजूल भूमि को निजी खाते में खपाने का आरोप।

 

बिलासपुर। मसीही समाज की बेशकीमती संपत्तियों और मिशन की जमीनों के कथित दुरुपयोग से जुड़े गंभीर मामले में जिला न्यायालय ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। कोर्ट ने सिविल लाइन थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी जताते हुए आरोपी जयदीप रॉबिंसन के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।

 

अदालत ने पुलिस को इस पूरी कार्रवाई को सुनिश्चित करने के लिए केवल सात दिनों की मोहलत दी है। न्यायाधीश ने आदेश में साफ चेतावनी दी है कि यदि इस बार समय सीमा के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट पेश नहीं की गई, तो इसे सीधे तौर पर न्यायालय की अवमानना मानकर अग्रिम विधिक कदम उठाए जाएंगे।

 

कोर्ट के आदेश को पुलिस ने किया हवा, भड़की अदालत

 

पूरा विवाद उस समय और गहरा गया जब पुलिस ने अदालत के पुराने आदेश को नजरअंदाज कर दिया। जानकारी के अनुसार, करीब एक महीने पहले ही जिला न्यायालय ने सिविल लाइन थाना प्रभारी को इस पूरे प्रकरण की जांच कर 16 जून को कोर्ट के समक्ष स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए थे।पीड़ित पक्ष ने इस अदालती आदेश की बकायदा सर्टिफाइड कॉपी भी सिविल लाइन थाने में खुद उपलब्ध करवाई थी। इसके बावजूद, तय तारीख यानी 16 जून को सुनवाई के दौरान सिविल लाइन थाने की तरफ से न तो कोई जांच अधिकारी कोर्ट पहुंचा और न ही कोई लिखित रिपोर्ट पेश की गई।

पुलिस की इस घोर लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को कोर्ट ने बेहद गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने इसे न्याय प्रक्रिया में बाधा माना और नाराजगी जताते हुए थाना प्रभारी को 'कारण बताओ नोटिस' जारी कर जवाब तलब कर लिया है।

फर्जी दस्तावेज और अपंजीकृत संस्था का बड़ा खेल

अदालत में दायर मुख्य शिकायत के मुताबिक, आरोपी जयदीप रॉबिंसन एक कथित अपंजीकृत संगठन का संचालन करता है। वह इसी गैर-कानूनी संस्था की आड़ लेकर खुद को मसीही समाज का सर्वेसर्वा और मुख्य प्रतिनिधि घोषित करता आ रहा है।

शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि आरोपी ने मसीही समाज के पूर्वजों और विभिन्न धार्मिक पदाधिकारियों द्वारा संरक्षित की गई शहर की सबसे महंगी नजूल भूमि को खुर्द-बुर्द कर दिया। इस प्राइम लोकेशन की जमीनों के सौदे करने के लिए बकायदा जाली कागजात और फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार की गई।

इतना ही नहीं, मिशन की इस विवादित जमीन की अवैध बिक्री से जो मोटी रकम प्राप्त हुई, उसे समाज या संस्था के खाते में जमा कराने के बजाय सीधे जयदीप रॉबिंसन ने अपने व्यक्तिगत बैंक खातों में ट्रांसफर कर लिया। शुरुआती जांच में यह पूरी तरह से धोखाधड़ी और वित्तीय गबन का मामला नजर आ रहा है।

रायपुर समेत कई जिलों में दर्ज हैं पुराने मुकदमे

मसीही समाज के स्थानीय पदाधिकारियों का कहना है कि आरोपी जयदीप रॉबिंसन लंबे समय से समाज की जमीनों और अन्य संपत्तियों में अवैध रूप से हस्तक्षेप कर रहा है। बार-बार विरोध करने के बाद भी जब उसकी संदिग्ध गतिविधियां बंद नहीं हुईं, तब समाज को विवश होकर अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

इस बीच पुलिस और अदालती हलकों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि आरोपी जयदीप रॉबिंसन का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। उसके खिलाफ पूर्व में राजधानी रायपुर समेत राज्य के कई अन्य जिलों में भी जालसाजी, धोखाधड़ी और जमीनों के अवैध सौदों से जुड़े गंभीर मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।

फिलहाल सिविल लाइन पुलिस को कोर्ट के कड़े अल्टीमेटम के बाद अब हर हाल में आगामी छह दिनों के भीतर केस दर्ज करना होगा। इसके साथ ही पुलिस प्रशासन आरोपी के पुराने थानों के रिकॉर्ड और अदालती दस्तावेजों को भी आधिकारिक रूप से खंगालने की कवायद में जुट गया है।