नई दिल्ली/नीस। भारत और फ्रांस के रिश्ते अब सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं रहे, बल्कि रणनीतिक साझेदारी के एक नए और बड़े दौर में प्रवेश कर चुके हैं। फ्रांस के नीस शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मुलाकात के बाद दोनों देशों ने ऐसा रोडमैप तैयार किया है, जो आने वाले वर्षों में रक्षा, व्यापार, तकनीक, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष क्षेत्र में नई संभावनाओं के दरवाजे खोल सकता है।

बैठक में सबसे बड़ा लक्ष्य अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को लगभग दोगुना करने का रखा गया है। इसके साथ ही राफेल लड़ाकू विमान परियोजना, परमाणु ऊर्जा सहयोग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हाई-स्पीड रेलवे और अंतरिक्ष मिशनों जैसे कई अहम क्षेत्रों में साझेदारी को नई गति देने पर सहमति बनी। खास बात यह रही कि भारत ने रक्षा क्षेत्र में सिर्फ खरीददार नहीं, बल्कि सह-विकास, सह-उत्पादन और 'मेक इन इंडिया' मॉडल के तहत वैश्विक रक्षा निर्माण केंद्र बनने का संकेत दिया।

राफेल सौदे से लेकर जैतापुर परमाणु परियोजना तक, दोनों देशों की बातचीत ने साफ कर दिया कि भारत और फ्रांस अब दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की तैयारी में हैं। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच यह साझेदारी सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि सुरक्षा और तकनीकी दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

भारत और फ्रांस के बीच हुए ये समझौते आने वाले वर्षों में निवेश, रोजगार, तकनीक हस्तांतरण और वैश्विक मंचों पर दोनों देशों की भूमिका को और मजबूत कर सकते हैं। यही वजह है कि इस मुलाकात को भारत-फ्रांस संबंधों के लिए एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।