जनगणना के मातृभाषा कॉलम में छत्तीसगढ़ी भाषा को शामिल करने की थी मांग।

 

 

 

NJV NEWS DESK / मुंगेली

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छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में एक बार फिर कलेक्ट्रेट परिसर अखाड़ा बन गया है। इस बार विवाद के केंद्र में सीधे जिले के मुखिया यानी मुंगेली कलेक्टर कुंदन कुमार हैं। दरअसल, आगामी जनगणना में छत्तीसगढ़ी भाषा को शामिल करने की मांग को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से ज्ञापन सौंपने पहुंचे छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के कार्यकर्ताओं के साथ कलेक्टर द्वारा कथित तौर पर अपमानजनक व्यवहार किया गया। इस दुर्व्यवहार के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में जमकर बवाल हुआ।

 

क्या है पूरा मामला?

 

छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना इन दिनों पूरे प्रदेश में अपनी मातृभाषा के सम्मान के लिए एक व्यापक अभियान चला रही है। उनकी प्रमुख मांग है कि आगामी 2026 की जनगणना के फॉर्म में मातृभाषा के कॉलम में 'छत्तीसगढ़ी' को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। इसी सिलसिले में राज्य के नोडल अधिकारी और सभी जिलों के कलेक्टरों को विधिवत ज्ञापन सौंपने का काम चल रहा है। जब इसी अभियान के तहत क्रांति सेना के कार्यकर्ता मुंगेली कलेक्टर कुंदन कुमार को ज्ञापन सौंपने उनके कार्यालय पहुंचे, तो उन्हें बेहद असहज स्थिति का सामना करना पड़ा।

आरोप है कि कलेक्टर कुंदन कुमार ने छत्तीसगढ़ियों से मुलाकात करने में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई। कार्यकर्ताओं को कलेक्ट्रेट में घंटों तक बाहर इंतजार कराया गया। काफी जद्दोजहद और इंतजार के बाद कलेक्टर महोदय ने केवल तीन लोगों को ज्ञापन देने के लिए अपने चेंबर में बुलाया।

 

साइकोलॉजिकल गेम' और अपमान

 

अंदर गए कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कलेक्टर ने एक प्रशासनिक अधिकारी की तरह सीधे और शांतिपूर्ण तरीके से ज्ञापन लेने के बजाय उन पर बारी-बारी से व्यंग्यात्मक टिप्पणियां शुरू कर दीं। कार्यकर्ताओं के मुताबिक, कुंदन कुमार उनके साथ 'साइकोलॉजिकल गेम' खेलने लगे। ज्ञापन की मूल भावना को दरकिनार करते हुए उन्होंने ऐसी टिप्पणियां कीं जिससे छत्तीसगढ़िया अस्मिता आहत हुई। बात यहीं खत्म नहीं हुई; कुछ ही देर में कलेक्टर ने झल्लाते हुए उन्हें अपने कमरे से बाहर निकाल दिया।

 

कलेक्ट्रेट में फूटा गुस्सा और हंगामा

 

इस तरह के तानाशाही और अपमानित व्यवहार से नाराज होकर छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने मुंगेली कलेक्ट्रेट परिसर में ही जमकर नारेबाजी और हंगामा शुरू कर दिया। कार्यकर्ताओं का साफ कहना था कि, "कलेक्टर का मूल काम जनता की समस्याएं सुनना और उनकी मांगों को शासन तक पहुंचाना है। चुपचाप ज्ञापन लेने के बजाय, सिर्फ छत्तीसगढ़िया होने की वजह से हमें अपमानित किया गया है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।" इस घटना के चलते कलेक्ट्रेट में घंटों तक गहमागहमी का माहौल बना रहा।

 

कुंदन कुमार और विवादों का पुराना नाता

 

गौरतलब है कि आईएएस कुंदन कुमार का विवादों से पुराना नाता रहा है। अपनी कार्यशैली और तल्ख रवैये को लेकर वे पहले भी अक्सर सुर्खियों में रहे हैं। सरगुजा जिले में अपनी पदस्थापना के दौरान भी उनकी प्रशासनिक शैली, मातहतों पर गुस्सा और आम जनता व जनप्रतिनिधियों के प्रति उनके सख्त रवैये को लेकर कई विवाद सामने आ चुके हैं। हाल ही में मुंगेली में ही एनएचएम (NHM) भर्ती में लापरवाही को लेकर सीएमएचओ को सरेआम फटकार लगाने का उनका मामला भी काफी चर्चित रहा था। अब क्रांति सेना के साथ हुए इस नए विवाद ने उनके प्रशासनिक रवैये पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।