बिलासपुर : छत्तीसगढ़ में संचालित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों की प्रशासनिक एवं वित्तीय व्यवस्था को लेकर शिक्षकों और कर्मचारियों में असंतोष गहराता जा रहा है। वेतन भुगतान में देरी, सीपीएफ के हिसाब-किताब में कथित अनियमितताओं और सेवा सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच सर्व शिक्षक संघ ने मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ ने कलेक्टर की अध्यक्षता वाली प्रबंधन समिति और प्रतिनियुक्ति व्यवस्था को तत्काल समाप्त कर विद्यालयों का संपूर्ण संचालन पूर्ववत स्कूल शिक्षा विभाग के अधीन करने की मांग उठाई है।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप पाण्डेय के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव एवं लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) के संचालक को ज्ञापन सौंपकर शिक्षकों-कर्मचारियों की समस्याओं से अवगत कराया। संघ का कहना है कि वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था के चलते विद्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों को कई स्तरों पर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में व्यवस्था की तत्काल समीक्षा कर नियमित विभागीय संचालन बहाल करना जरूरी है।
कलेक्टर समिति पर को समाप्त, विभागीय नियंत्रण बहाल करने की मांग
स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों का संचालन वर्तमान में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता वाली प्रबंधन समितियों के माध्यम से किया जा रहा है। सर्व शिक्षक संघ ने इस व्यवस्था को समाप्त करने की मांग की है। संघ का तर्क है कि विद्यालयों का प्रशासनिक और शैक्षणिक नियंत्रण पूर्व की भांति सीधे स्कूल शिक्षा विभाग के अधीन होना चाहिए, ताकि शिक्षकों की सेवा संबंधी समस्याओं का नियमित और प्रभावी निराकरण हो सके।
वेतन में देरी से हर महीने आर्थिक संकट
संघ ने आरोप लगाया है कि प्रतिनियुक्ति व्यवस्था के चलते शिक्षकों और कर्मचारियों को नियमित वेतन समय पर नहीं मिल पा रहा है। वेतन भुगतान में देरी के कारण कर्मचारियों को हर महीने आर्थिक परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। परिवार की जरूरतों, घरेलू खर्चो और अन्य वित्तीय जिम्मेदारियों के बीच वेतन की अनिश्चितता उनके लिए मानसिक तनाव का कारण बन रही है।
सीपीएफ के हिसाब में अनियमितता का आरोप
शिक्षकों-कर्मचारियों की एक बड़ी चिंता उनके भविष्य निधि से भी जुड़ी है। संघ ने सीपीएफ की कटौती और उसके लेखा-जोखा में कथित अनियमितताओं को लेकर कहा है कि कर्मचारियों को अपनी जमा राशि का स्पष्ट विवरण नहीं मिल पा रहा है। यह स्थिति कर्मचारियों के आर्थिक भविष्य को लेकर गंभीर समस्या खड़े करती है। लंबे समय तक ऐसी अनिश्चितता बने रहने से सेवा लाभ और भविष्य की वित्तीय सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका है।
सेवा सुरक्षा, पेंशन को लेकर बढ़ रही चिंता
संघ ने कहा है कि मौजूदा व्यवस्था को लेकर शिक्षकों और कर्मचारियों के मन में सेवा सुरक्षा, पेंशन तथा भविष्य निधि पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर आशंकाएं हैं। कर्मचारियों का मानना है कि सेवा संबंधी नियमों और वित्तीय दायित्वों में स्पष्टता के अभाव से भविष्य में कठिनाइयां बढ़ सकती हैं। इसलिए केवल तात्कालिक समस्याओं का समाधान ही नहीं, बल्कि सेवा शर्तों और वित्तीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
शासन तत्काल ले निर्णय
सर्व शिक्षक संघ ने शासन से मांग की है कि शिक्षकों एवं कर्मचारियों के हितों को प्राथमिकता देते हुए कलेक्टर की अध्यक्षता वाली प्रबंधन समिति और प्रतिनियुक्ति व्यवस्था समाप्त की जाए। साथ ही, स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों का संपूर्ण प्रशासनिक, वित्तीय और शैक्षणिक नियंत्रण पूर्ववत स्कूल शिक्षा विभाग को सौंपा जाए। संघ का कहना है कि नियमित विभागीय व्यवस्था बहाल होने से वेतन भुगतान, सीपीएफ संबंधी समस्याओं और सेवा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के निराकरण में स्पष्टता आ सकती है तथा विद्यालयों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण कायम रखने में मदद मिलेगी।