बिलासपुर : बच्चों की देखभाल, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं अब अपने हक की लड़ाई को तेज करने के मूड में हैं। लंबित मांगों को लेकर आज नेहरू चौक पर धरना-प्रदर्शन किया गया। इसके बाद रैली निकालकर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां मुख्यमंत्री, महिला एवं बाल विकास मंत्री और विभागीय सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा गया। आंदोलनकारियों ने दो टूक चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र किया जाएगा।

धरना २

75 साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहने का आरोप

प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन से जुड़ी रोजमर्रा की जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं। बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों, प्रारंभिक शिक्षा और विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ उनसे कई अतिरिक्त काम भी लिए जाते हैं। इसके बावजूद उन्हें अपेक्षित आर्थिक सुरक्षा, सामाजिक संरक्षण और सेवा संबंधी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

सुनीता सिंह ने कहा है कि महिला एवं बाल विकास व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी होने के बावजूद उन्हें अब तक नियमित कर्मचारियों जैसी सुविधाओं से वंचित रखा गया है। महंगाई के मौजूदा दौर में कम मानदेय के कारण आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वर्षों तक जिम्मेदारियां निभाने के बाद भी उन्हें स्थायी रोजगार और सम्मानजनक पारिश्रमिक के लिए संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है।

नियमितीकरण तक कार्यकर्ता को 30 हजार, सहायिका को 25 हजार रुपये देने की मांग

आंगनबाड़ी कर्मियों की प्रमुख मांग सेवा का नियमितीकरण है। उनका कहना है कि जब तक नियमितीकरण नहीं होता, तब तक श्रम कानूनों के अनुरूप आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को 30 हजार रुपये और सहायिकाओं को 25 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाए, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें और अपने परिवार की जरूरतें पूरी कर सकें।

पदोन्नति में उम्र की बाधा खत्म करने की मांग

कार्यकर्ताओं ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सुपरवाइजर पद पर तथा सहायिकाओं को कार्यकर्ता के पद पर सीधे पदोन्नति देने की मांग की है। इसके साथ ही पदोन्नति में उम्र संबंधी बाधा समाप्त करने की मांग की गई है। उनका कहना है कि वर्षों के अनुभव और सेवा को पदोन्नति में उचित महत्व मिलना चाहिए।

बीमा, पेंशन, ग्रेच्युटी और पीएफ भी मांगा

प्रदर्शनकारियों ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए समूह बीमा, पेंशन, ग्रेच्युटी और पीएफ जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। उनका कहना है कि लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद भविष्य की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होने से कर्मचारियों को लगातार चिंता का सामना करना पड़ता है।

मृत्यु पर अनुकंपा नियुक्ति, सेवानिवृत्ति पर आर्थिक सहायता

ज्ञापन में सेवा के दौरान आकस्मिक मृत्यु होने पर परिवार के पात्र सदस्य को तत्काल अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग भी शामिल है। इसके अलावा सेवानिवृत्ति के समय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को 5 लाख रुपये और सहायिका को 3 लाख रुपये की एकमुश्त सहायता देने की मांग की गई है। प्रदर्शनकारियों ने मध्यप्रदेश की तर्ज पर प्रतिवर्ष मानदेय में एक हजार रुपये की वृद्धि किए जाने की मांग भी रखी।

अतिरिक्त काम का बोझ, नियमित जिम्मेदारियों पर असर

आंदोलनकारियों का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों की मूल जिम्मेदारियों के अलावा दूसरे विभागीय कार्य भी सौंपे जाते हैं। इससे काम का दबाव बढ़ता है और केंद्रों की नियमित गतिविधियां प्रभावित होने की आशंका रहती है। उनका तर्क है कि यदि सरकार उनसे योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की अपेक्षा करती है, तो उनके काम, समय और जिम्मेदारियों के अनुरूप सुविधाएं भी सुनिश्चित करनी चाहिए।

नेहरू चौक से कलेक्ट्रेट तक निकली रैली के जरिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की। ज्ञापन सौंपने के बाद आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष केवल मानदेय बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि नियमितीकरण, पदोन्नति, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक सेवा शर्तों से भी जुड़ा है। अब देखना होगा कि सरकार इन लंबित मांगों पर क्या रुख अपनाती है। फिलहाल प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि मांगों की अनदेखी जारी रही, तो आंदोलन का अगला चरण और व्यापक हो सकता है।