आज के डिजिटल दौर में मोबाइल फोन को पैंट की जेब में रखना और लैपटॉप को गोद में रखकर काम करना आम बात है। लेकिन क्या रोजमर्रा की ये आदतें पुरुषों की स्पर्म हेल्थ और फर्टिलिटी यानी प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं? इस सवाल को लेकर कई वैज्ञानिक अध्ययन किए गए हैं। कुछ शोधों में लैपटॉप के इस्तेमाल से अंडकोष के तापमान में बढ़ोतरी देखी गई है, जबकि मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडियोफ्रीक्वेंसी ऊर्जा और शुक्राणुओं की गुणवत्ता के बीच संबंध को लेकर मिले नतीजे अभी निर्णायक नहीं हैं। ऐसे में जरूरी है कि डरने के बजाय उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों को समझा जाए और कुछ आसान सावधानियां अपनाई जाएं।

स्पर्म हेल्थ के लिए तापमान क्यों है महत्वपूर्ण?
पुरुषों के अंडकोष यानी टेस्टिस शरीर के सामान्य तापमान से लगभग 2–3 डिग्री सेल्सियस कम तापमान पर रहते हैं। शुक्राणुओं के सामान्य निर्माण के लिए यह तापमान महत्वपूर्ण माना जाता है। लंबे समय तक अंडकोष के आसपास अधिक गर्मी रहने से शुक्राणु निर्माण और उनकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। हालांकि, इसका असर व्यक्ति, गर्मी की तीव्रता और संपर्क की अवधि के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। यही वजह है कि लैपटॉप को लंबे समय तक सीधे गोद में रखकर इस्तेमाल करने को लेकर वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है।

गोद में लैपटॉप रखने से क्या बढ़ सकता है अंडकोष का तापमान?
लैपटॉप इस्तेमाल करते समय डिवाइस से निकलने वाली गर्मी और बैठने की मुद्रा, दोनों अंडकोष के आसपास के तापमान को प्रभावित कर सकते हैं। वर्ष 2005 में प्रकाशित एक अध्ययन में 29 स्वस्थ पुरुषों पर लैपटॉप इस्तेमाल करने के दौरान अंडकोष के तापमान को मापा गया। शोध में पाया गया कि लैपटॉप के साथ बैठने पर तापमान बढ़ सकता है। पैरों को पास रखकर बैठने से भी तापमान में बढ़ोतरी देखी गई। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि लैपटॉप के नीचे पैड रखने से तापमान बढ़ने की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई।

हालांकि, तापमान बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि लैपटॉप इस्तेमाल करने से हर व्यक्ति की स्पर्म क्वालिटी निश्चित रूप से खराब हो जाएगी। इस तरह के अध्ययनों से मुख्य रूप से तापमान में बदलाव का पता चलता है। वास्तविक प्रजनन क्षमता पर लंबे समय तक पड़ने वाले प्रभावों को समझने के लिए अतिरिक्त प्रमाण जरूरी हैं।

क्या पैंट की जेब में मोबाइल रखने से स्पर्म काउंट घटता है?
मोबाइल फोन रेडियोफ्रीक्वेंसी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड यानी RF-EMF का इस्तेमाल करके वायरलेस सिग्नल भेजते और प्राप्त करते हैं। वैज्ञानिक यह जांचते रहे हैं कि इन तरंगों के संपर्क का शुक्राणुओं की संख्या, गतिशीलता और संरचना पर कोई असर पड़ता है या नहीं।

कुछ अध्ययनों और समीक्षा रिपोर्टों में मोबाइल फोन के अधिक इस्तेमाल या लंबे समय तक संपर्क के साथ शुक्राणुओं की गुणवत्ता में बदलाव का संबंध सामने आया है। लेकिन कई अध्ययनों की सीमाएं भी हैं। इनमें मोबाइल इस्तेमाल की अवधि का स्वयं बताया जाना, जीवनशैली के दूसरे कारक और अध्ययन की अलग-अलग पद्धतियां शामिल हैं। इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि पैंट की जेब में फोन रखने से निश्चित रूप से स्पर्म काउंट कम हो जाता है या बांझपन हो जाता है। इस संबंध को स्पष्ट करने के लिए बेहतर गुणवत्ता वाले शोध की जरूरत है।

क्या मोबाइल और लैपटॉप से पुरुषों में बांझपन हो सकता है?
फर्टिलिटी पर असर डालने वाले कई कारक होते हैं। इनमें हार्मोन संबंधी समस्याएं, कुछ बीमारियां, धूम्रपान, शराब का अधिक सेवन, मोटापा, संक्रमण, कुछ दवाएं और अंडकोष के आसपास लंबे समय तक अधिक गर्मी रहना शामिल हो सकते हैं। मोबाइल फोन और लैपटॉप के इस्तेमाल को लेकर शोध जारी है, लेकिन केवल इन गैजेट्स के इस्तेमाल के आधार पर किसी व्यक्ति की प्रजनन क्षमता के बारे में निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। अगर किसी दंपती को गर्भधारण में परेशानी हो रही है, तो सिर्फ मोबाइल या लैपटॉप को इसका कारण मानने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है।

स्पर्म हेल्थ का ध्यान रखने के लिए अपनाएं ये 6 आदतें

1. लैपटॉप को टेबल पर रखकर इस्तेमाल करें: इससे गोद में सीधे गर्मी पहुंचने की संभावना कम होती है और बैठने की मुद्रा भी बेहतर रहती है।

2. गर्म लैपटॉप को लंबे समय तक गोद में न रखें: डिवाइस बहुत गर्म हो रहा हो, तो उसे समतल और हवादार सतह पर रखें।

3. मोबाइल रखने की जगह बदल सकते हैं: फोन को बैग या डेस्क पर रखना एक आसान सावधानी है। हालांकि, इससे फर्टिलिटी बेहतर होने का पक्का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

4. अत्यधिक गर्मी से बचें: बार-बार लंबे समय तक सॉना, हॉट टब या अन्य तेज गर्मी वाले वातावरण में रहने से बचना उपयोगी हो सकता है, खासकर यदि फर्टिलिटी को लेकर चिंता हो।

5. धूम्रपान से दूरी बनाएं: धूम्रपान शुक्राणुओं की गुणवत्ता और संपूर्ण स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। शराब का सेवन भी सीमित रखना बेहतर है।

6. डाइट, व्यायाम और नींद पर ध्यान दें: संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, स्वस्थ वजन और पर्याप्त नींद सामान्य स्वास्थ्य के साथ प्रजनन स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

स्पर्म क्वालिटी को लेकर कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?
अगर लंबे समय से गर्भधारण में परेशानी हो रही है या प्रजनन स्वास्थ्य को लेकर चिंता है, तो यूरोलॉजिस्ट या पुरुष प्रजनन विशेषज्ञ से सलाह लें। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर सीमेन एनालिसिस यानी वीर्य जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। इस जांच से शुक्राणुओं की संख्या, गतिशीलता और आकार से जुड़ी जानकारी मिलती है।

निष्कर्ष: लैपटॉप को गोद में रखने से अंडकोष का तापमान बढ़ने के प्रमाण मौजूद हैं, लेकिन इससे हर व्यक्ति में बांझपन होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। मोबाइल फोन और स्पर्म हेल्थ के बीच संबंध पर भी अभी निर्णायक प्रमाण नहीं हैं। इसलिए घबराने के बजाय व्यावहारिक सावधानियां अपनाएं और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से सलाह लें।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है, किसी व्यक्तिगत बीमारी का निदान या उपचार नहीं। फर्टिलिटी संबंधी समस्या होने पर योग्य डॉक्टर से संपर्क करें।