बिलासपुर/कोटा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी 'पीएम जनमन योजना' बिलासपुर जिले में भारी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है। विशेष पिछड़ी जनजातियों (PVTG) और सुदूर इलाकों के विकास के लिए लाई गई इस योजना में बेलगहना-कोटा क्षेत्र में 420.14 करोड़ रुपए की लागत से 31 सड़कें बनाई जा रही हैं। लेकिन ये सड़कें विकास का नहीं, बल्कि 'कमीशनखोरी और घपलेबाजी' का जीता-जागता मॉडल बन चुकी हैं। आलम यह है कि करोड़ों की लागत से बिछाई जा रही इन सड़कों का डामर हाथ लगाते ही पापड़ की तरह उखड़ रहा है। डामर की जगह डस्ट (धूल) और गुणवत्ता की जगह सिर्फ और सिर्फ लीपापोती नजर आ रही है।

करहीकछार, भेलवा और टिकरी... ये वो गांव हैं जहां सड़क निर्माण के नाम पर सीधे तौर पर सरकारी खजाने में सेंधमारी की गई है। करहीकछार में लगभग 4 किलोमीटर लंबी सड़क पर डामरीकरण हुए अभी बमुश्किल तीन दिन ही बीते थे कि सड़क की परतें अपने आप उखड़ने लगीं। डामर और इमल्शन की मात्रा इतनी कम है कि सड़क की पकड़ बिल्कुल जीरो हो चुकी है। ग्रामीणों ने जब इसका वीडियो बनाकर विरोध जताना शुरू किया, तो ठेकेदार ने सड़क उखाड़कर दोबारा बनाने के बजाय रातों-रात उसी के ऊपर लीपापोती कर दी।

बेलगहना से 3 किमी दूर शिव टिकारी और बैगापारा में तो हद xही पार हो गई। यहां बिना प्राइमर और टैंक कोट डाले सीधे मिट्टी और धूल पर डामर बिछाया जा रहा है।

ठंडा डामर और गायब गिट्टी... ठेकेदार की खुली मनमानी**

इस 420.14 करोड़ के महाप्रोजेक्ट का ठेका सवगढ़ के मेसर्स सुनील अग्रवाल और अनिल अग्रवाल को मिला है। तकनीकी मानकों के अनुसार, प्लांट से निकलने वाला डामर गर्म अवस्था में ही सड़क पर बिछना चाहिए, लेकिन दूर से लाने के कारण डामर लाते-लाते ठंडा हो जाता है और ठेकेदार उसी ठंडे डामर को सड़क पर थोप दे रहे हैं।

गड़बड़ी सिर्फ डामर में नहीं है, सड़क की नींव यानी डब्ल्यूएमएम (WMM) लेयर भी खोखली है। इसमें तय साइज की गिट्टी होनी चाहिए, लेकिन ठेकेदार ने पैसा बचाने के चक्कर में गिट्टी कम और डस्ट (धूल) ज्यादा मिला दी है। जब भास्कर की टीम ने मौके पर काम कर रहे मजदूरों से सवाल किया, तो उनका रटा-रटाया जवाब था- "हमें जितना बोला गया है, उतना कर रहे हैं, सुपरवाइजर से पूछो।" हैरानी की बात यह है कि 420 करोड़ के इस काम में मौके पर न तो कोई इंजीनियर मौजूद मिला और न ही एसडीओ।

 

क्यू

 

 

इस पूरे खेल पर लोक निर्माण विभाग (PWD) के सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता वाय.के. गोपाल ने तस्वीरों को देखकर साफ शब्दों में कहा, सड़क बनाने का तरीका ही पूरी तरह गलत और अमानक है। डामर बिछाने से पहले प्राइमर और टैंक कोट डालना अनिवार्य होता है, लेकिन यहां सीधे मिट्टी पर ही डामर बिछा दिया गया है, जो नियमों के बिल्कुल खिलाफ है।

 

अफसरों का वहीं अंदाज जवाब भी....

 

जब भ्रष्टाचार की ये परतें उखड़ने लगीं और ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ा, तो पीएमजीएसवाई के कार्यपालन यंत्री परीक्षित सूर्यवंशी की कुंभकर्णी नींद टूटी। उन्होंने अपना चिर-परिचित सरकारी बयान जारी करते हुए कहा- सड़क की गुणवत्ता खराब होने की शिकायतें मिली हैं। इंजीनियर और एसडीओ की टीम को मौके पर जांच के लिए भेज रहे हैं। यदि मानकों में कमी पाई गई, तो संबंधितों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।