रायपुर। छत्तीसगढ़ में 12वीं बोर्ड परीक्षा के हिंदी विषय का पर्चा लीक होने का मामला अब पूरी तरह से तूल पकड़ चुका है। रविवार को राजधानी रायपुर के अंबेडकर चौक पर बड़ी संख्या में छात्र इकट्ठा हुए और शिक्षा तंत्र की खामियों पर सवाल उठाते हुए व्यवस्था में सुधार की मांग रखी। परीक्षार्थियों ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस पूरे प्रकरण में राज्य के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को जिम्मेदार ठहराते हुए छात्रों ने उनसे नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने की मांग कर दी है।

प्रशासनिक स्तर पर हो रही चूक और निगरानी तंत्र की विफलता के कारण युवाओं का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। धरने पर बैठे छात्रों का कहना है कि सिर्फ स्कूली बोर्ड ही नहीं, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं में भी बार-बार पेपर लीक की घटनाएं सामने आ रही हैं। इससे परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं और पूरी शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता खतरे में पड़ गई है। छात्रों ने सरकार से कड़े कदम उठाने की अपील करते हुए कहा कि भविष्य से होने वाले इस खिलवाड़ को रोकने के लिए एक ऐसा सख्त कानून बनना चाहिए, जिससे दोषियों में खौफ पैदा हो। युवाओं ने यह भी मांग रखी कि जिन लोगों की लापरवाही या मिलीभगत से यह घटनाएं हो रही हैं, उन पर तुरंत और कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

हरिका राव के परिवार के लिए मांगा न्याय

अंबेडकर चौक पर हुए इस विरोध प्रदर्शन में री-नीट परीक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। छात्रों ने नीट विवाद के बाद मानसिक दबाव में आकर आत्महत्या करने वाली छात्रा हरिका राव का जिक्र करते हुए न्याय की गुहार लगाई। प्रदर्शनकारी युवाओं ने सरकार के सामने यह मांग रखी है कि हरिका राव के परिवार को न केवल उचित मुआवजा दिया जाए, बल्कि इस पूरे प्रकरण की जवाबदेही भी तय हो।

एनएसयूआई ने दिया धरने को समर्थन

छात्रों के इस स्वतः स्फूर्त आंदोलन को राजनीतिक और छात्र संगठनों का भी सहारा मिल गया है। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी इस विरोध में शामिल होने के लिए अंबेडकर चौक पहुंचे। संगठन के नेताओं ने छात्रों के साथ धरने पर बैठकर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने की मांग उठाई। उनका कहना था कि जब तक व्यवस्था में बैठे जवाबदेह लोगों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति होती रहेगी।

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

प्रशासनिक नजरिए से देखा जाए तो, गोपनीयता भंग होने की यह घटना विभाग की बड़ी नाकामी है। अंबेडकर चौक पर उमड़ी छात्रों की भारी भीड़ और मंत्री के इस्तीफे की मांग ने सरकार पर राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव बढ़ा दिया है। अब शासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती परीक्षा प्रणाली में दोबारा से भरोसा कायम करने और खामियों को दूर करने की है। पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर मौजूद रही और प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास करती रही, लेकिन युवा अपने भविष्य की सुरक्षा को लेकर ठोस आश्वासन की मांग पर अड़े रहे। राजधानी में हुआ यह प्रदर्शन यह बताने के लिए काफी है कि युवा वर्ग अब केवल खोखले वादों से संतुष्ट होने वाला नहीं है।