
अंबिकापुर (छत्तीसगढ़) आपने फिल्मों में तो पुलिस को गच्चा देते हुए कई शातिर चोरों को देखा होगा, लेकिन छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में जो कांड हुआ है, उसने बॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर मसाला फिल्मों को भी पीछे छोड़ दिया है! इसे कहते हैं— उल्टा चोर, कोतवाल को ही चूना लगा दे! सूबे में आमतौर पर पुलिस का भौकाल टाइट रहता है, लेकिन अंबिकापुर में खाकी के साथ ऐसा 'खेला' हुआ कि खुद पुलिस महकमे के ही होश फाख्ता हो गए। गांजा तस्करों पर 'सिंघम स्टाइल' में रेड मारने गई पुलिस की टीम उस वक्त सिर पकड़ कर बैठ गई, जब उन्हें पता चला कि कोई उनकी शान की सवारी यानी 'सरकारी बोलेरो' ही उड़ा ले गया है!
जब शिकारी खुद बन गया शिकार
यह पूरी कहानी किसी कॉमेडी-थ्रिलर से कम नहीं है। हुआ यूं कि कोतवाली पुलिस की एक टीम पूरी मुस्तैदी और भारी लाव-लश्कर के साथ ‘सत्तीपारा’ इलाके में गांजा तस्करों के खिलाफ एक सीक्रेट ऑपरेशन पर निकली थी। इस टीम की कमान संभाल रहे थे प्रशिक्षु डीएसपी निशांत कुर्रे। साहब अपनी टीम के साथ सरकारी बोलेरो में सवार होकर पूरे रौब के साथ इलाके में पहुंचे। गाड़ी को एक गली के बाहर शान से खड़ा किया गया और पुलिसिया स्टाइल में टीम अपराधियों को दबोचने के लिए पैदल ही अंदर घुस गई। उन्हें लगा कि आज तो तस्करों की खैर नहीं, लेकिन उन्हें क्या पता था कि आज किस्मत उनके ही मजे लेने वाली है!
पुलिस अंदर सूंघ रही थी गांजा, बाहर चोर ने कर दिया 'कांड
इधर पुलिस तस्करों के ठिकानों पर खाक छान रही थी और उधर एक शातिर चोर मुकेश नामदेव की नजर सड़क पर लावारिस खड़ी चमचमाती सरकारी गाड़ी पर पड़ गई। मुकेश ने न पुलिस का खौफ खाया, न उस खाकी वर्दी का डर। भाई साहब ने आव देखा न ताव, चुपके से गाड़ी में हाथ साफ किया और सीधे पुलिस की ही गाड़ी का स्टेयरिंग थामकर रफूचक्कर हो गए।
जरा सोचिए उस नजारे को— पुलिस अंदर गांजा ढूंढ रही है, और बाहर उनका रथ ही गायब! जब पुलिस की टीम पसीना बहाकर बाहर आई और अपनी गाड़ी नदारद देखी, तो महकमे में जो हड़कंप मचा, वो देखने लायक था।
चोर ओवरस्मार्ट था, पर साहब का फोन 'ब्रह्मास्त्र' बन गया
पुलिस की सरेआम भद पिट चुकी थी और शहर में हाई अलर्ट जैसा माहौल बन गया। लेकिन कहते हैं ना, हर अपराधी कोई न कोई सुराग छोड़ता है। चोर मुकेश ने पुलिस की गाड़ी तो उड़ा ली थी, लेकिन वो एक बहुत बड़ी और "महंगी" चूक कर बैठा। दरअसल, प्रशिक्षु डीएसपी साहब अपना मोबाइल फोन जल्दबाजी में गाड़ी में ही भूल गए थे। बस फिर क्या था! साइबर सेल की टीम तुरंत एक्टिव हुई और मोबाइल की लोकेशन को ट्रेस करना शुरू कर दिया।
क्लाइमेक्स: राम मंदिर के पास खत्म हुआ एडवेंचर
जीपीएस लोकेशन का पीछा करते-करते पुलिस की टीम ‘राम मंदिर’ के पास पहुंची। वहां शातिर मुकेश नामदेव अपनी चुराई हुई 'वीआईपी सवारी' के साथ मजे से पुलिस के हत्थे चढ़ गया। पुलिस ने घेराबंदी कर न सिर्फ मुकेश को धर दबोचा, बल्कि अपनी बोलेरो और उसकी चाबियां भी सकुशल वापस हासिल कर लीं।
भले ही कुछ घंटों की भारी फजीहत और किरकिरी के बाद खाकी को अपनी गाड़ी वापस मिल गई हो, लेकिन इस घटना ने पूरे शहर में चटखारे लेने का पूरा मौका दे दिया है। अब चोर मुकेश सलाखों के पीछे बैठकर ये जरूर सोच रहा होगा कि पुलिस की गाड़ी चुराने का ये 'एडवेंचर' उसे कितना भारी पड़ गया! वहीं, आम जनता दबी जुबान में बस एक ही सवाल पूछ रही है— *जब पुलिस खुद की गाड़ी सुरक्षित नहीं रख पा रही, तो अपराधियों के इस बढ़ते हौसले के बीच कीआम आदमी का क्या होगा?