रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कारोबारी की एक्टिवा से 53 लाख रुपये की उठाईगिरी के मामले में सिविल लाइंस पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने वारदात को अंजाम देने से पहले करीब एक सप्ताह तक कारोबारी की रेकी की थी। घटना के बाद पहचान छिपाने के लिए कपड़े बदले, बाइक की नंबर प्लेट हटाई और पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। यहां तक कि कथित तौर पर उठाई गई रकम को गीजर, टीवी और बच्चों के खिलौनों में छिपाकर रखा गया था।

पान खाने रुका कारोबारी, एक्टिवा से गायब हुआ रुपयों से भरा बैग
पुलिस के अनुसार, शैलेंद्र नगर निवासी कारोबारी किशोर बलवानी का पंडरी में रेडीमेड कपड़ों का व्यवसाय है। 9 अक्टूबर को वह कटोरा चौक स्थित संत कंवर राम चौक के पास पान खाने के लिए रुके थे। इस दौरान उनकी एक्टिवा के पायदान में रखा 53 लाख रुपये से भरा बैग गायब हो गया। बैग नहीं मिलने पर कारोबारी ने थाने में शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल लाइंस पुलिस और क्राइम ब्रांच ने जांच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के मार्गों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और संदिग्धों की गतिविधियों को जोड़ते हुए जांच आगे बढ़ाई।

एक सप्ताह तक की रेकी, फिर दिया वारदात को अंजाम
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान डीडीनगर सेक्टर-2 निवासी मनीष यदु और टाटीबंध निवासी कमलेश कुशवाहा के रूप में हुई है। पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि वे करीब एक सप्ताह से कारोबारी की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे। वे कारोबारी के घर से दुकान आने-जाने के रास्तों और उनकी दिनचर्या की जानकारी जुटा रहे थे। इसके बाद संत कंवर राम चौक के पास मौका मिलने पर वारदात को अंजाम दिया।

हजारों CCTV फुटेज से आरोपियों तक पहुंची पुलिस
पुलिस के अनुसार, वारदात में इस्तेमाल की गई पल्सर बाइक की नंबर प्लेट हटा दी गई थी। ऐसे में आरोपियों तक पहुंचना जांच टीम के लिए चुनौती था। पुलिस ने बाइक के संभावित रास्तों पर लगे हजारों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की। इसी पड़ताल के आधार पर संदिग्धों की गतिविधियों का पता लगाते हुए पुलिस आरोपियों तक पहुंची। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने कथित तौर पर पुलिस से बचने के लिए घटनास्थल से कुछ दूरी पर कपड़े बदले थे। उन्होंने वारदात को अंतरराज्यीय गिरोह से जोड़कर जांच को भटकाने की कोशिश भी की।

गीजर, टीवी और खिलौनों में छिपाई रकम
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने कथित तौर पर चोरी की रकम को बरामदगी से बचाने के लिए घर में लगे गीजर, टीवी और बच्चों के खिलौनों के अंदर छिपाया था। रकम का कुछ हिस्सा तीन बैंक खातों में भी जमा कराया गया था, जिन्हें पुलिस ने फ्रीज कराया है। पुलिस का कहना है कि मोबाइल फोन की लोकेशन ट्रेस होने से बचने के लिए आरोपियों ने अपने फोन फ्लाइट मोड पर रखे थे। इसके बावजूद सीसीटीवी फुटेज और अन्य जांच के आधार पर पुलिस ने मामले का खुलासा किया।

आरोपियों के पुराने रिकॉर्ड की भी जांच
पुलिस के अनुसार, आरोपी मनीष यदु वर्ष 2012 में आजाद चौक थाना क्षेत्र के एक मामले में जेल जा चुका है। पुलिस ने यह भी बताया कि दोनों आरोपी जुआ और सट्टा खेलने के आदी थे तथा ड्राइवर के रूप में काम करते थे। पूछताछ में उन्होंने पैसों की जरूरत को वारदात की वजह बताया है। फिलहाल, मामले में बरामद रकम, बैंक खातों में जमा राशि और आरोपियों की भूमिका से संबंधित विस्तृत जानकारी पुलिस की आधिकारिक पुष्टि के अनुसार सामने आएगी।