
रायपुर। छत्तीसगढ़ में शराब बिक्री और ओवर रेटिंग का मामला अब सत्ता की छत्रछाया और और अफसरों की दबंगई का उदाहरण बन गया है। सरकार जहां सुशासन और जीरो टॉलरेंस का दावा कर रही है वही आबकारी विभाग की कार्यशैली गंभीर सवालो को जन्म दे रही हैं। विभाग ने अपना चेहरा चमकाने के लिए कुछ अफसरों पर कार्रवाई जरूर की है। लेकिन जिन आधिकारियों को सत्ताधारी दल के नेताओं और टॉप लेबल अफसरों के आशीर्वाद प्राप्त है उनपर कार्यवाही करने में विभाग के हाथ पैर कांप रहे हैं।
निलंबन की फाइल पुटअप मगर......
आबकारी अधिकारियों के निलंबन की फाइल पुट अप हुए कई दिन बीत चुके हैं। फिर भी दागी इंस्पेक्टरों पर कोई एक्शन नहीं हुआ है।
पूरा मामला बेहद गंभीर है। राष्ट्रपति द्वारा गोद ली गई संरक्षित बैगा जनजाति के लोगों को ये आबकारी इंस्पेक्टर सरेआम धमका रहे हैं। आदिवासियों को झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकियां दी जा रही हैं। कोरे कागज पर उनके हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं। इस पूरी गुंडागर्दी के वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं। सारे सबूत सामने हैं। इसके बावजूद इन दो आबकारी इंस्पेक्टरों को बचाने के लिए विभाग ने पूरी ताकत लगा दी है।
आखिर इन अफसरों को किसका संरक्षण प्राप्त है यह बड़ा सवाल है। इसका जवाब खुद इन अफसरों के बयानों में छिपा है। सूत्रों के मुताबिक ये इंस्पेक्टर खुलेआम दावा कर रहे हैं कि उनके संबंध कमिश्नर से लेकर सीधे गृहमंत्री तक हैं। उनका कहना है कि कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। इस अफसर की पहुंच का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसने नौकरी ज्वाइन करने के बाद कभी ट्रेनिंग ही नहीं की।
पिछली सरकार के दौरान मात्र छह महीने में इसे सीधे डिस्टलरी में पोस्टिंग मिल गई थी। उस वक्त शराब घोटाले के आरोपी कवासी लखमा आबकारी मंत्री थे। बताया जाता है कि मंत्री ने सीधे आबकारी सचिव को फोन किया और इस अफसर को बिलासपुर डिस्टलरी का प्रभार मिल गया। सत्ता बदली लेकिन इस अफसर का रुतबा कम नहीं हुआ। अब यह अफवाह उड़ाई जा रही है कि गृहमंत्री के करीबियों से इसके सीधे संबंध हैं। इस तरह की बातों से नई सरकार की साफ सुथरी छवि पर सीधा दाग लग रहा है।
हाल ही में आबकारी विभाग के उड़नदस्ता दल ने प्रदेश भर में छापामार कार्रवाई की थी। रायपुर धमतरी खैरागढ़ गंडई हिरमी और कुरूद में एमआरपी से साठ रुपये तक ज्यादा वसूली पकड़ी गई थी। विभाग ने चार उप निरीक्षकों कौशल किशोर सोनी प्रभाकर सिरमौर मनराखन नेताम और पुरुषोत्तम सिन्हा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। इसके साथ ही निरूपमा लोन्हारे मुकेश अग्रवाल राजेश कुमार शर्मा और जेबा खान समेत आठ अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया था।
आबकारी आयुक्त पीएस एल्मा ने सख्त लहजे में कहा था कि उपभोक्ताओं से ज्यादा वसूली बड़ी अनियमितता है और इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लेकिन जब बात रसूखदार इंस्पेक्टरों की आती है तो आबकारी विभाग के सारे नियम कानून और सख्ती धरी की धरी रह जाती है। वायरल वीडियो और ठोस साक्ष्य होने के बाद भी विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है। इससे साफ है कि सिस्टम में ऊपर से लेकर नीचे तक इन दागी अफसरों को बचाने का खुला खेल चल रहा है।