नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठ और नागरिकता सत्यापन को लेकर शुरू हुई राजनीतिक और प्रशासनिक सख्ती अब जमीनी स्तर पर असर दिखाने लगी है। राज्य में भाजपा समर्थित “डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट” अभियान के बाद सीमा इलाकों में हलचल तेज हो गई है। उत्तर 24 परगना के हाकिमपुर बॉर्डर क्षेत्र से सामने आए वीडियो और तस्वीरों ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। दावा किया जा रहा है कि बड़ी संख्या में लोग बांग्लादेश लौटने के लिए सीमा क्षेत्रों में जुट रहे हैं।

भाजपा ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि राज्य में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिक अब कार्रवाई के डर से वापस लौटने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि जैसे ही नागरिकता सत्यापन और होल्डिंग सेंटर की प्रक्रिया तेज हुई, वैसे ही सीमावर्ती इलाकों में हलचल बढ़ गई। भाजपा का दावा है कि पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद अवैध प्रवासियों की पहचान कर उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत देश से बाहर भेजने की तैयारी शुरू कर दी गई है।

सूत्रों के मुताबिक, मालदा में बनाए गए विशेष होल्डिंग सेंटर में उन लोगों को रखा जाएगा, जिनकी नागरिकता संदिग्ध पाई जाएगी। इसके बाद जांच पूरी होने पर उन्हें सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जरिए डिपोर्ट किए जाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। हाल ही में एक बैठक के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट कहा था कि जो लोग नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के दायरे से बाहर हैं और वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाते, उन्हें अवैध घुसपैठिया माना जाएगा। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति और ज्यादा गरमा गई है।

विपक्षी दलों ने भाजपा पर इस मुद्दे को राजनीतिक हथियार बनाने का आरोप लगाया है, जबकि भाजपा इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और जनसांख्यिकीय संतुलन से जुड़ा मामला बता रही है। सीमा क्षेत्रों में बढ़ती गतिविधियों और वायरल वीडियो के बाद प्रशासनिक एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं। आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में अवैध घुसपैठ और नागरिकता का मुद्दा और अधिक उग्र रूप ले सकता है, क्योंकि यह अब सिर्फ सुरक्षा नहीं बल्कि चुनावी रणनीति का भी बड़ा हिस्सा बन चुका है।