रायपुर। छत्तीसगढ़ में सोना खरीदने वाले ग्राहकों के लिए यह बहुत काम की खबर है. केंद्र सरकार के सख्त नियमों के बाद भी पूरे राज्य में धड़ल्ले से बिना हॉलमार्क वाली ज्वेलरी बेची जा रही है. प्रदेश में 12 हजार से ज्यादा सराफा कारोबारी हैं लेकिन इनमें से सिर्फ 5 हजार के पास ही हॉलमार्क का सरकारी लाइसेंस है. इसका सीधा मतलब है कि 7 हजार ज्वेलर्स बिना लाइसेंस के अपना धंधा चला रहे हैं. अब भारतीय मानक ब्यूरो यानी बीआईएस के अफसरों ने सख्त चेतावनी दी है कि बिना हॉलमार्क लाइसेंस के किसी को भी कारोबार नहीं करने दिया जाएगा. अगर दुकान में बिना हॉलमार्क के गहने मिले तो उन्हें तुरंत जब्त कर लिया जाएगा. साथ ही व्यापारी का बिजनेस लाइसेंस रद्द होगा और उसे जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है.

पिछले ही हफ्ते बीआईएस की टीम ने रायपुर के दो सराफा कारोबारियों की दुकानों पर अचानक छापा मारा था. वहां से 140 सोने के गहने जब्त किए गए जिन पर हॉलमार्क नहीं था. इस बड़ी कार्रवाई के बाद से पूरे प्रदेश के सराफा बाजार में हड़कंप मचा हुआ है. डर के मारे अब व्यापारी भाग दौड़ कर रहे हैं. सराफा एसोसिएशन का दावा है कि सिर्फ इसी हफ्ते 4 हजार से ज्यादा व्यापारी लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले हैं.

जुर्माने और जेल का कड़ा नियम

नियम तोड़ने पर सजा बहुत कड़ी है. अगर कोई व्यापारी बिना हॉलमार्क या फर्जी हॉलमार्क वाले गहने बेचता है तो 1 लाख रुपए का सीधा जुर्माना लगेगा और तुरंत एफआईआर दर्ज होगी. यही नहीं ग्राहक को बेचे गए गहने की कीमत का पांच गुना तक जुर्माना भी वसूला जा सकता है. बार बार धोखाधड़ी करने पर जेल जाना पक्का है.

पुराने सोने पर सुनारों की मनमानी और बट्टा

हॉलमार्किंग और नए नियमों से एक तरफ नए गहनों में ग्राहकों को फायदा है लेकिन पुराने सोने के मामले में सुनार अभी भी भारी मनमानी कर रहे हैं. जब भी कोई ग्राहक अपना पुराना सोना बेचने या बदलने जाता है तो सुनार अपनी मर्जी से मनमौजी तरीके से बट्टा काट लेते हैं. इसका कोई पक्का नियम नहीं है. हर सुनार अपने हिसाब से पुराने सोने का वजन और शुद्धता कम बताकर मनचाहा बट्टा काट लेता है जिससे ग्राहकों को हजारों रुपए का भारी नुकसान सहना पड़ता है.

ऐसे चेक करें अपने गहने की शुद्धता

नियमों के मुताबिक जिन व्यापारियों का सालाना टर्नओवर 40 लाख रुपए से कम है उन्हें लाइसेंस नहीं लेना है. लेकिन रायपुर जैसे शहर में लगभग सभी ज्वेलर्स का टर्नओवर एक करोड़ से ज्यादा है. गहनों पर बीआईएस का तिकोना लोगो कैरेट और 6 अंकों का एचयूआईडी कोड लिखा होना एकदम जरूरी है. ग्राहक खुद भी बीआईएस केयर एप से गहने की शुद्धता जांच सकते हैं. मोबाइल एप के वेरीफाई एचयूआईडी सेक्शन में 6 अंकों का कोड डालने से सारा सच सामने आ जाता है.

लाइसेंस लेने में व्यापारी इसलिए कर रहे देरी

व्यापारी लाइसेंस लेने से इसलिए पीछे हट रहे हैं क्योंकि राज्य के 33 जिलों में हॉलमार्क सेंटर ही नहीं हैं. दूर दराज के व्यापारियों को गहने लेकर दूसरे शहर जाना पड़ता है. इस पूरी प्रक्रिया में तीन दिन का समय लग जाता है जिससे उनका धंधा प्रभावित होता है. पूरे प्रदेश में सिर्फ 17 हॉलमार्क सेंटर हैं. इनमें रायपुर में सबसे ज्यादा 9 दुर्ग में 2 और अंबिकापुर राजनांदगांव बिलासपुर में एक एक सेंटर है. सराफा एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष कमल सोनी ने सभी व्यापारियों से जल्द से जल्द पंजीयन कराने की अपील की है ताकि वे किसी भी तरह की सरकारी कार्रवाई और परेशानी से बच सकें.