रायपुर. सरगुजा में विधायक राम कुमार टोप्पो का विवाद अब एक बड़े प्रशासनिक भूचाल में बदल गया है. प्रदेश भर के राजस्व अधिकारी और कर्मचारी सामूहिक छुट्टी लेकर बैठ गए हैं. सरकारी दफ्तरों में सन्नाटा पसरा है और आम जनता परेशान है. अधिकारी एक ही मांग पर अड़े हैं कि जब तक विधायक और उनके समर्थकों की गिरफ्तारी नहीं होती वे काम पर नहीं लौटेंगे. अंबिकापुर कलेक्ट्रेट के बाहर सभी अधिकारी और कर्मचारी बांहों में काली पट्टी बांधकर धरने पर बैठ गए हैं और लिपिक संघ ने भी इनका पूरा साथ दिया है.

इस पूरे मामले में पुलिस का रवैया आग में घी डालने का काम कर रहा है. गिरफ्तारी की मांग को लेकर जब राजस्व विभाग और पटवारी संघ के अफसर अपना ज्ञापन सौंपने पहुंचे तो एसपी ऑफिस में एक अलग ही ड्रामा देखने को मिला. अधिकारी सीधे पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल को ज्ञापन देना चाहते थे. लेकिन एसपी साहब ज्ञापन लेने से ऐसे बचते नजर आए जैसे कोई बड़ी आफत आ गई हो. उन्होंने संघ से खुद मिलने के बजाय एडिशनल एसपी अमोलक सिंह को आगे कर दिया.

एसपी का यह टालमटोल वाला रवैया राजस्व अधिकारियों को बिल्कुल रास नहीं आया. उन्होंने इसे अपनी इज्जत का सवाल बना लिया और एएसपी को ज्ञापन देने से साफ मना करते हुए वहां से बैरंग लौट गए. इसके बाद गुस्से में तमतमाए अधिकारियों का पूरा हुजूम सीधे सरगुजा रेंज के आईजी दीपक कुमार झा के दफ्तर पहुंच गया. सबसे दिलचस्प नजारा तब दिखा जब अफसर आईजी को अपनी शिकायत सुना ही रहे थे कि पीछे पीछे एसपी राजेश अग्रवाल भी वहां पहुंच गए. एसपी को अचानक वहां देखकर माहौल और ज्यादा असहज हो गया.

सूत्रों की मानें तो इस दौरान आईजी साहब ने अफसरों को एक बड़ी गजब की सलाह दे डाली. उन्होंने संघ से कहा कि आप लोग तीन दिन रुक जाइए. कोई आंदोलन या धरना प्रदर्शन करने की जरूरत नहीं है. तीन दिन बाद विधायक जी खुद आकर गिरफ्तारी देंगे. आईजी साहब का यह जवाब सुनकर संघ वाले भी हैरान रह गए. उन्होंने भी पलटवार करते हुए सीधा सवाल दागा कि क्या अब पुलिस आरोपी का इंतजार करेगी. मतलब जब आरोपी का मूड होगा और वह अपनी मर्जी से आएगा तभी पुलिस उसे गिरफ्तार करेगी.

इस बीच सोशल मीडिया पर एक और नया वीडियो वायरल हो गया है जिससे कहानी में नया मोड़ आ गया है. वीडियो में विधायक रामकुमार टोप्पो अपने समर्थकों के भारी काफिले के साथ पूरी शान से गिरफ्तारी देने के लिए निकलते हुए नजर आ रहे हैं. लेकिन ट्विस्ट यह है कि विधायक जी का यह लंबा चौड़ा काफिला किस थाने में जाकर रुका और उन्होंने कहां गिरफ्तारी दी यह रहस्य अब तक नहीं सुलझ पाया है. चर्चा है कि रास्ते में उनके वफादार समर्थकों ने उन्हें रोक लिया और वह थाने पहुंचे ही नहीं.

इधर इस ड्रामे के बीच जनता के मन में एक बड़ा और मजेदार सवाल भी खड़ा हो रहा है. लोग यह सोचकर चकरा रहे हैं कि क्या कानून में कोई ऐसा नया नियम आया है जहां सीधे आईजी के सामने जाकर गिरफ्तारी दी जाती है. सब जानते हैं कि सरेंडर हमेशा संबंधित थाने में होता है. लेकिन लगता है सरगुजा में रसूखदारों के लिए कानून की कोई अलग ही किताब चलती है जहां पुलिस खुद आरोपी की सुविधा का इंतजार करती है. फिलहाल विधायक जी की इस गुमशुदा गिरफ्तारी को लेकर पूरे प्रदेश में चटकारे लेकर चर्चा हो रही है और सरकारी कामकाज ठप पड़ा है.