बिलासपुर । बिलासपुर जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां रसूख के आगे पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ओवरटेक के मामूली विवाद में खुद को भाजपा का जिला संयोजक बताने वाले एक नेता और उसके बेटे ने एक बाइक सवार के साथ कथित तौर पर जमकर मारपीट की। लेकिन हद तो तब हो गई जब थाने पहुंचने पर पुलिस ने पीड़ित की एफआईआर (FIR) दर्ज करने के बजाय, उलटे उसी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया और उसे 'कोर्ट जाने' की नसीहत दे दी।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरी घटना सीपत थाना क्षेत्र के ग्राम बिटकुला की है। बुधवार सुबह बाइक सवार शिवाजी पाटनवार किसी काम से बिलासपुर की ओर आ रहे थे।

 पीड़ित का आरोप शिवाजी का कहना है कि रास्ते में एक तेज रफ्तार कार ने उनकी बाइक को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। जब उन्होंने रुककर इस लापरवाही का विरोध किया, तो कार सवार लोग बाहर निकले और उन्हें घेर लिया।

 आरोपियों की दबंगई:कार में सवार व्यक्ति ने खुद को भाजपा का जिला संयोजक तामेश्वर कौशिक बताया। उसके साथ उसका बेटा राजेश कौशिक और एक अन्य साथी भी मौजूद था। आरोप है कि तीनों ने मिलकर शिवाजी के साथ गाली-गलौज की और लात-घूंसों से पीटा।

 

सबूत मिटाने की कोशिश:

 जब पीड़ित ने खुद को बचाने और घटना का वीडियो बनाने की कोशिश की, तो आरोपियों ने उसका मोबाइल छीनकर सड़क पर पटक दिया और तोड़ डाला। जाते-जाते उन्होंने गाड़ी फूंकने और जान से मारने की धमकी भी दी।

 

थाने में नहीं मिला न्याय, पुलिस का अलग ही तर्क

 

मारपीट का शिकार होने के बाद न्याय की आस में शिवाजी सीपत थाने पहुंचे। लेकिन वहां उन्हें पुलिस का अलग ही रवैया देखने को मिला। पीड़ित का आरोप है कि पुलिस ने नेता के दबाव में कार्रवाई करने के बजाय मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की और उन्हें समझाकर घर भेज दिया।

इस पूरे मामले में सीपत टीआई राजेश मिश्रा का बयान सामने आया है। उन्होंने बताया कि:घटना के बाद दोनों पक्ष थाने आए थे। हमारी जांच में पता चला है कि कार ने नहीं, बल्कि बाइक ने कार को पीछे से टक्कर मारी थी। थाने में दोनों के बीच सिर्फ विवाद होना पाया गया, मारपीट की पुष्टि नहीं हुई है।

 

पुलिस ने पीड़ित शिवाजी के मारपीट के आरोपों को नकारते हुए उन्हें सीधे कोर्ट में परिवाद दायर करने की सलाह दे दी।

 

उलटा पीड़ित पर ही दर्ज हुआ मामला

 

इस मामले में पुलिस का दोहरा रवैया तब साफ हो गया, जब उन्होंने आरोपी पक्ष (नेता के बेटे की रिपोर्ट) की शिकायत पर बिना देर किए बाइक सवार शिवाजी पाटनवार के ही खिलाफ 'मोटर व्हीकल एक्ट' (MV Act) के तहत मामला दर्ज कर लिया।