
सक्ती। Sakti जिले में हुए भीषण औद्योगिक हादसे के बाद अब मुआवजे और जवाबदेही की प्रक्रिया तेज हो गई है। Vedanta Limited के पावर प्लांट में हुए ब्लास्ट में जान गंवाने वाले मजदूरों के परिवारों को राहत देने का दावा करते हुए प्रबंधन ने बताया कि अधिकांश प्रभावितों को मुआवजा राशि जारी कर दी गई है। हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा मानकों और श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
14 अप्रैल को सिंघीतराई स्थित प्लांट में बॉयलर पाइप फटने से बड़ा विस्फोट हुआ था, जिसमें कई मजदूर इसकी चपेट में आ गए। इस हादसे में 24 श्रमिकों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए है। कुछ घायलों का अभी भी विभिन्न अस्पतालों में इलाज जारी है, वहीं कुछ को उपचार के बाद छुट्टी दी जा चुकी है। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य तंत्र पर भी तत्काल राहत और बचाव कार्यों को लेकर दबाव बना रहा।
कंपनी की ओर से मृतकों के परिजनों को 35-35 लाख रुपए और एक सदस्य को नौकरी देने का आश्वासन दिया गया है, जबकि घायलों के लिए 15-15 लाख रुपए की सहायता राशि घोषित की गई है। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार और Prime Minister's National Relief Fund की ओर से भी आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है, जिससे प्रभावित परिवारों को कुछ राहत मिल सके। हालांकि, मुआवजे की प्रक्रिया के साथ-साथ पारदर्शिता और समयबद्ध भुगतान को लेकर नजरें टिकी हुई हैं।
हादसे की गंभीरता को देखते हुए बिलासपुर संभाग स्तर पर उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी गई है। आयुक्त Sunil Jain को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो दुर्घटना के वास्तविक कारणों, जिम्मेदारियों और सुरक्षा खामियों की गहन पड़ताल करेंगे। प्रशासन ने आम नागरिकों और प्रत्यक्षदर्शियों से भी साक्ष्य और जानकारी साझा करने की अपील की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।

