सरगुजा : जिले में अवैध लकड़ी कटाई और तस्करी के खिलाफ वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। लुंड्रा क्षेत्र में आधी रात की गई छापेमारी के दौरान वन विभाग की टीम ने लकड़ी के अवैध परिवहन में इस्तेमाल किए जा रहे तीन वाहनों और भारी मशीनरी को जब्त किया है। मौके पर बड़ी मात्रा में लकड़ी के लट्ठे भी बरामद किए गए हैं। आईएफएस अधिकारी कुणाल मिश्रा के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई के बाद इलाके में सक्रिय वन माफियाओं में हड़कंप मच गया है।

आधी रात घेराबंदी, लकड़ी की खेप ले जाने की थी तैयारी

मिली जानकारी के अनुसार लुंड्रा क्षेत्र में एक गुप्त ठिकाने पर भारी मात्रा में लकड़ी के लट्ठों की लोडिंग की जा रही थी। इसके लिए सामान्य संसाधनों के बजाय भारी क्षमता वाली मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा था। वन विभाग को मामले की जानकारी मिलने के बाद टीम ने मौके पर दबिश दी और लकड़ी से लदे वाहनों को रवाना होने से पहले ही घेराबंदी कर पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान सामने आया कि लकड़ी के बड़े-बड़े लट्ठों को उठाने और ट्रकों में लोड करने के लिए हाइड्रोलिक क्रेन तथा भारी लोहे के ग्रैबर से लैस जॉन डियर ट्रैक्टर-लोडर का इस्तेमाल किया जा रहा था। इस तरह के उपकरणों के उपयोग से अवैध लकड़ी परिवहन के पीछे संगठित गतिविधियों की आशंका को लेकर जांच की जा रही है।

ट्रक, ट्रैक्टर और भारी लोडर मशीन जब्त

वन विभाग की कार्रवाई में लकड़ी की लोडिंग और परिवहन से जुड़े तीन प्रमुख वाहनों को जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। जिसमें 12 चक्का ट्रक पंजीयन क्रमांक सीजी 5 एसी 5272 बताया गया है कि इसमें लकड़ी की खेप लोड थी, स्वराज ट्रैक्टर पंजीयन क्रमांक सीजी 14 एमई 9903, जॉन डियर ट्रैक्टर-लोडर माइन 5310 मॉडल, जिसमें भारी हाइड्रोलिक क्रेन और ग्रैबर लगे हुए थे। जब्त वाहनों को सील कर सुरक्षित रूप से डिपो में खड़ा कराया गया है। वन विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि लकड़ी कहां से काटकर लाई गई थी और इस पूरे कारोबार में किन लोगों की भूमिका रही है।

राजस्व विभाग ने भी संभाला मोर्चा, डंप लकड़ी जब्त

वन विभाग की कार्रवाई के साथ राजस्व विभाग की टीम ने भी मौके पर पहुंचकर अवैध कटाई के बाद डंप किए गए लकड़ी के लट्ठों को अपने कब्जे में लिया। अब लकड़ी के वास्तविक स्रोत, कटाई की जगह और उसके परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि इतनी बड़ी मात्रा में लकड़ी एकत्र करने और उसे भारी वाहनों के जरिए बाहर ले जाने की तैयारी किसके संरक्षण या सहयोग से की जा रही थी। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

वन कानूनों के तहत कार्रवाई, जब्त वाहनों की राजसात प्रक्रिया की पड़ताल

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मामले में छत्तीसगढ़ अभिवहन (वनोपज) नियम, 2001 के नियम 3, संबंधित अभिवहन नियमों के नियम 22(2) और भारतीय वन अधिनियम की धारा 52(1) के तहत कार्रवाई का उल्लेख किया गया है। इन प्रावधानों के तहत अवैध वनोपज और अपराध में इस्तेमाल किए गए वाहनों तथा उपकरणों की जब्ती से संबंधित कार्रवाई की जा सकती है। मामले में लागू प्रावधानों और आगे की कानूनी प्रक्रिया की पुष्टि विभागीय रिकॉर्ड से होना बाकी है।

पूरी रात चली वन अमले की कार्रवाई

इस अभियान में रेंजर बीना पटेल, परिक्षेत्र सहायक संजय तिर्की, अलवीन कुजूर, सतीश यादव, दिनेश तिवारी, मूलचंद, राम पंडो, अवधेश कुमार, सोमनाथ बड़ा, प्रवीण सिंह, कुबेर सिंह, राजन गुप्ता सहित लुंड्रा रेंज का वन अमला सक्रिय रहा। टीम ने रातभर कार्रवाई करते हुए वाहनों की जब्ती और लकड़ी को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया पूरी की।

कहां से आई लकड़ी? अब तस्करी नेटवर्क की जांच

इतनी बड़ी मात्रा में कीमती लकड़ी किस जंगल से काटी गई और उसे एक स्थान पर जमा कर भारी ट्रक के जरिए परिवहन करने की योजना किसने बनाई थी? जांच के दौरान वाहन मालिकों, लकड़ी की कटाई में शामिल लोगों, परिवहनकर्ताओं और संभावित बिचौलियों की भूमिका की पड़ताल की जा सकती है। वन विभाग का अगला कदम लकड़ी की उत्पत्ति का पता लगाने और पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने पर केंद्रित है। जांच में यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

भाजपा नेता आलोक दुबे ने कार्रवाई का किया स्वागत

भाजपा नेता एवं पार्षद आलोक दुबे इससे पहले भी सरगुजा के जंगलों में कथित अवैध कटाई और लकड़ी तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने की मांग कर चुके हैं। इस कार्रवाई के बाद उन्होंने वन माफियाओं के खिलाफ सख्त कदम उठाने और जंगलों को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि जंगलों को बचाने के लिए अवैध कटाई और तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाना जरूरी है। अब निगाहें वन विभाग की आगे की जांच पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस मामले के पीछे कौन लोग शामिल हैं और लकड़ी तस्करी का नेटवर्क कितने बड़े स्तर पर काम कर रहा था।