रायपुर। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस जैसे गैर-राजनीतिक कार्यक्रम में भी राजनीतिक नाराजगी और संगठनात्मक खींचतान खुलकर सामने आ गई। रायपुर में आयोजित योग दिवस कार्यक्रम के दौरान भाजपा विधायक ईश्वर साहू अपनी तस्वीर प्रचार सामग्री में नहीं होने पर नाराज हो गए। मामला इतना बढ़ गया कि उन्होंने इसे जानबूझकर किया गया कदम बताते हुए संगठन स्तर पर शिकायत करने की चेतावनी दे दी। इस घटनाक्रम ने कार्यक्रम के मूल उद्देश्य से ज्यादा राजनीतिक चर्चा को हवा दे दी।

जानकारी के अनुसार, विधायक ईश्वर साहू जब कार्यक्रम स्थल पहुंचे तो उन्होंने देखा कि बैनर, पोस्टर और होर्डिंग में उनकी तस्वीर शामिल नहीं है। इसे लेकर उन्होंने नाराजगी जताई और इसे अपनी उपेक्षा का मामला बताया। सूत्रों के मुताबिक, योगाभ्यास पूरा करने के बाद उन्होंने कार्यक्रम में अधिक समय नहीं बिताया और बीच में ही लौट गए। इससे आयोजन के दौरान मौजूद लोगों के बीच भी चर्चा शुरू हो गई।

वहीं दूसरी ओर बिलासपुर के तखतपुर में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू भी अव्यवस्थाओं को लेकर नाराज नजर आए। कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक को आमंत्रित नहीं किए जाने और अपेक्षित संख्या में हितग्राहियों की अनुपस्थिति पर उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाई। मंत्री की नाराजगी ने यह संकेत दिया कि सरकारी आयोजनों में समन्वय और तैयारी को लेकर अब भी गंभीर खामियां बनी हुई हैं।

इन दोनों घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जनहित और सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए आयोजित कार्यक्रम आखिर क्यों बार-बार राजनीतिक असंतोष और प्रबंधन की कमियों का शिकार हो जाते हैं। जब मंच पर विकास और जनकल्याण की बात हो रही हो, तब नेताओं की नाराजगी और अधिकारियों की लापरवाही सुर्खियां बन जाना आयोजन की सफलता पर भी सवाल खड़े करता है।

फिलहाल, दोनों मामलों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। एक तरफ तस्वीर को लेकर नाराजगी है, तो दूसरी तरफ व्यवस्थाओं को लेकर फटकार। ऐसे में यह बहस भी शुरू हो गई है कि क्या सरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रमों का फोकस अब उद्देश्य से ज्यादा राजनीतिक संतुलन और प्रोटोकॉल निभाने तक सीमित होता जा रहा है।