नई दिल्ली। चर्चित कॉमेडी शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ से जुड़े विवाद में कॉमेडियन समय रैना और पॉडकास्टर रणवीर इलाहाबादिया को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शो में कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों पर शीर्ष अदालत ने हस्तक्षेप करते हुए एफआईआर रद्द कर दी हैं। हालांकि राहत के साथ सुप्रीम कोर्ट ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमाओं को लेकर भी स्पष्ट संदेश दिया। अदालत ने कहा कि बोलने की आजादी महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके नाम पर सामाजिक मर्यादा और जिम्मेदारी की अनदेखी नहीं की जा सकती।

कई राज्यों में दर्ज मामलों से मिली राहत
‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ के एक एपिसोड में की गई टिप्पणियों के बाद रणवीर इलाहाबादिया, समय रैना और अन्य लोगों के खिलाफ कई जगह शिकायतें और एफआईआर दर्ज हुई थीं। मामला बढ़ने के बाद रणवीर इलाहाबादिया ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अलग-अलग जगहों पर दर्ज मामलों को एक साथ करने और आगे की दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने पूरे विवाद पर विचार किया और अब संबंधित एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया है।

अभिव्यक्ति की आजादी पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार असीमित नहीं है। सार्वजनिक मंच पर कही गई बातों के सामाजिक प्रभाव और मर्यादा को भी ध्यान में रखना जरूरी है। अदालत ने विशेष रूप से आपत्तिजनक भाषा और सामाजिक संवेदनशीलता से जुड़े पहलुओं पर नाराजगी जताई। साथ ही, न्यायिक प्रक्रिया और अदालत के आदेशों को गंभीरता से लेने की हिदायत दी।

समय रैना को भी मिली कड़ी चेतावनी
सुनवाई के दौरान कनाडा में किए गए एक कार्यक्रम से जुड़े समय रैना के कथित बयान का भी उल्लेख हुआ। इसी संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने अदालत की गरिमा और आदेशों के पालन को लेकर उन्हें सख्त संदेश दिया। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया के साथ किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

धमकियों के बीच सुरक्षा को लेकर भी राहत
विवाद के बाद रणवीर इलाहाबादिया को कथित तौर पर जान से मारने की धमकियां मिलने की बात भी सामने आई थी। इस पहलू को देखते हुए शीर्ष अदालत ने उन्हें सुरक्षा से संबंधित कानूनी उपाय अपनाने की अनुमति दी। यानी अदालत ने एक तरफ मामले में दर्ज एफआईआर को लेकर राहत दी, तो दूसरी तरफ सार्वजनिक मंच पर जिम्मेदार व्यवहार और न्यायिक प्रक्रिया का पालन करने की आवश्यकता भी रेखांकित की।

आखिर किस बयान से शुरू हुआ था पूरा विवाद?
‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ के एक एपिसोड में रणवीर इलाहाबादिया बतौर गेस्ट पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान माता-पिता और रिश्तों को लेकर की गई उनकी एक टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई। इसके बाद सोशल मीडिया पर भारी विरोध शुरू हुआ। कई लोगों ने टिप्पणी को अश्लील और आपत्तिजनक बताया, जबकि मामले ने राजनीतिक और कानूनी रूप भी ले लिया। शिकायतों के बाद समय रैना, रणवीर इलाहाबादिया, आशीष चंचलानी और अपूर्वा मखीजा समेत कुछ अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई।

शो के एपिसोड भी हटाए गए थे
विवाद बढ़ने के बाद समय रैना ने ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ के पुराने एपिसोड अपने यूट्यूब चैनल से हटा दिए थे। इस पूरे घटनाक्रम ने ऑनलाइन कॉमेडी, कंटेंट की सीमाओं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर देशभर में बहस छेड़ दी थी।

FIR रद्द, लेकिन कोर्ट का संदेश साफ
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से समय रैना और रणवीर इलाहाबादिया को कानूनी राहत जरूर मिली है, लेकिन सुनवाई के दौरान अदालत की टिप्पणियां यह संकेत देती हैं कि कॉमेडी और अभिव्यक्ति की आजादी के साथ सामाजिक जिम्मेदारी और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान भी जरूरी है।