नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ बेहद आक्रामक बयान देकर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। खामेनेई ने साफ कहा कि अब मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक मौजूदगी को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने इसे इस्लामी देशों की संप्रभुता के लिए खतरा बताते हुए मुस्लिम राष्ट्रों से एकजुट होने की अपील की। उनके बयान के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा और अमेरिका-ईरान संबंधों को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं।22-1779790414076

मोजतबा खामेनेई के कार्यालय की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी संदेश में कहा गया कि “समय बदल चुका है और अब पश्चिम एशिया अमेरिकी सैन्य साजिशों का केंद्र नहीं बनेगा।” पोस्ट में अमेरिका और इजरायल विरोधी नारों को “दबे-कुचले लोगों की आवाज” बताया गया। साथ ही हज के मौके को वैश्विक इस्लामी एकजुटता और फिलिस्तीन समर्थन के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल करने का आह्वान किया गया। इस बयान को ईरान की नई आक्रामक कूटनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।3-1779790428423

अपने संबोधन में मोजतबा ने अपने पिता और पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे “शहादत” बताते हुए दावा किया कि इस घटना ने ईरान और इस्लामी दुनिया को और अधिक मजबूत किया है। गौरतलब है कि फरवरी में हुए अमेरिका-इजरायल के कथित संयुक्त हमले में अली खामेनेई की मौत के बाद मोजतबा को सर्वोच्च नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। तब से वह पश्चिमी देशों के खिलाफ लगातार सख्त बयान देते रहे हैं और ईरान की सैन्य तथा वैचारिक ताकत को खुलकर सामने ला रहे हैं।1-1779790403111

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिशें धीमी पड़ चुकी हैं। परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय संघर्ष और इजरायल-फिलिस्तीन विवाद को लेकर दोनों देशों के बीच अविश्वास लगातार बढ़ रहा है। मोजतबा खामेनेई की यह चेतावनी आने वाले दिनों में मिडिल ईस्ट की राजनीति और सुरक्षा समीकरणों को और अधिक अस्थिर कर सकती है। वहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस बात पर नजर बनाए हुए है कि क्या यह बयान केवल राजनीतिक संदेश है या क्षेत्र में किसी बड़े टकराव की भूमिका तैयार की जा रही है।