
रायपुर । छत्तीसगढ़ के 3200 करोड़ रुपए से अधिक के बहुचर्चित शराब घोटाले में ईओडब्ल्यू ने बुधवार को विशेष अदालत में अपना 10वां पूरक चालान पेश कर दिया है। पूरे 27 हजार पन्नों के इस विस्तृत चालान में जांच एजेंसी ने 42 नए आरोपियों को शामिल किया है जिनमें 20 प्रभावशाली व्यक्ति और 22 कंपनियां शामिल हैं। इनमें प्रमुख रूप से पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा के बेटे यश टुटेजा, कारोबारी अनवर ढेबर के भाई अख्तर ढेबर, प्रिंस भाटिया, आशीष केडिया, विधु गुप्ता और एक आबकारी अधिकारी का नाम है। इस सिंडिकेट ने बिना आबकारी शुल्क वाली शराब की बिक्री, डुप्लीकेट होलोग्राम और फर्जी परमिट के जरिए अवैध वसूली का एक बड़ा तंत्र खड़ा कर लिया था।
ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया है कि इस पूरे सिंडिकेट ने सुनियोजित तरीके से राज्य के खजाने को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया। चालान में कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल पर पार्टी फंड के नाम पर 1000 करोड़ रुपए से अधिक की रकम का हिसाब किताब रखने का गंभीर आरोप लगाया गया है। जांच एजेंसी के मुताबिक सिंडिकेट ने शराब की बोतलों पर नकली होलोग्राम लगाकर उन्हें सरकारी दुकानों से बेचा और इसका सीधा मुनाफा अपनी जेबों में डाला। इस मामले में आंगड़िया नेटवर्क चलाने वाले खंजन ठक्कर और बीआर लोहिया को जांच एजेंसी ने फरार घोषित किया है जिनकी तलाश तेज कर दी गई है।
नोट के सीरियल नंबर बने टोकन, 208 करोड़ पहुंचे दुबई
शराब घोटाले की अवैध कमाई को देश से बाहर भेजने के लिए एक बड़े हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया। जांच एजेंसी द्वारा जब्त किए गए एक मोबाइल फोन की एक्सेल शीट ने सारा राज खोल दिया है। इस शीट के अनुसार 27 मई 2022 से 21 जून 2022 के बीच कुल 27 बड़े लेनदेन हुए हैं। इन लेनदेन के जरिए सिंडिकेट के एक अहम सदस्य विकास अग्रवाल उर्फ सुब्बू को दुबई में 208.46 करोड़ रुपए पहुंचाए गए। खंजन ठक्कर का यह नेटवर्क मुंबई से दुबई तक फैला था। यह सिंडिकेट रायपुर से मुंबई तक नकद भेजता था और फिर दुबई में बैठी नोवा स्कोटिया गोल्ड ट्रेडिंग एलएलसी नामक कंपनी के जरिए वहां बराबर की रकम उपलब्ध कराई जाती थी। इस पूरी प्रक्रिया में लेनदेन पक्का करने के लिए भारतीय नोटों के सीरियल नंबर का इस्तेमाल टोकन के रूप में किया जाता था।
शराब बिक्री के अलावा मैनपावर आपूर्ति में भी करोड़ों का खेल हुआ। ईओडब्ल्यू ने मैनपावर भुगतान में हुई गड़बड़ी को लेकर तत्कालीन सीएसएमसीएल एमडी अरुणपति त्रिपाठी और ईगल हंटर सॉल्यूशन के संचालक बीआर लोहिया के खिलाफ भी अलग से पूरक चालान पेश किया है। जांच रिपोर्ट के अनुसार साल 2019 से 2023 के बीच प्रदेश में काम कर रही पांच मैनपावर एजेंसियों को ओवरटाइम, बोनस, चार अतिरिक्त दिनों के काम और सेवा शुल्क के नाम पर 182.98 करोड़ रुपए का फर्जी भुगतान किया गया। यह वह पैसा था जो कभी कर्मचारियों तक पहुंचा ही नहीं बल्कि कमीशन के तौर पर वापस अधिकारियों की जेब में चला गया।
मैनपावर फर्जीवाड़ा: कमीशन के 32 करोड़ अनवर ढेबर तक पहुंचे
अरुणपति त्रिपाठी के एमडी रहते हुए मैनपावर कंपनियों को 152.40 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया गया। इसके एवज में कंपनियों से 28 से 32 करोड़ रुपए का कमीशन वसूला गया जिसे सीधे अनवर ढेबर तक पहुंचाया गया। केवल बीआर लोहिया की दो कंपनियों ईगल हंटर और अलर्ट कमांडोज को ही 48.08 करोड़ रुपए से अधिक का अतिरिक्त फायदा पहुंचाया गया। पेंडिंग बिल पास कराने के एवज में तय किए गए 28.80 लाख रुपए पहले ही ईडी जब्त कर चुकी है। अरुणपति फिलहाल न्यायिक अभिरक्षा में जेल में हैं जबकि लोहिया फरार है।
जांच के घेरे में आए नए नाम
इस 10वें पूरक चालान में एजेंसी ने रामगोपाल अग्रवाल, यश टुटेजा, अख्तर ढेबर के साथ नवीन केडिया, राजेन्द्र जायसवाल उर्फ चुन्नू जायसवाल, भूपेन्दर पाल सिंह भाटिया उर्फ गोल्डी भाटिया, विधु गुप्ता, अशोक सिंह, नवनीत गुप्ता, सत्येन्द्र प्रकाश गर्ग, विकास कुमार, राजीव द्विवेदी, एन उदय राव, आशीष सौरभ केडिया, सुमित मालू उर्फ टिंकू, रवि बजाज और आबकारी अधिकारी को मुख्य रूप से आरोपी बनाया है।
अब संपत्तियों की जब्ती की तैयारी
जांच एजेंसी अब उन सभी 22 कंपनियों के बैंक खातों और संपत्तियों का ब्यौरा खंगाल रही है जिनके नाम इस चालान में शामिल हैं। ईओडब्ल्यू के सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में आबकारी विभाग के कुछ और अधिकारियों को पूछताछ के लिए तलब किया जा सकता है। इसके साथ ही विदेश भेजी गई रकम की रिकवरी के लिए भी कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा रही है।