
नई दिल्ली/चंडीगढ़। पंचकूला नगर निगम (एमसी पंचकूला) के बहुचर्चित बैंक घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए 131.13 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क (Provisional Attachment) कर दी हैं। इसके साथ ही एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत 9 आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint) भी दाखिल कर दी है। ईडी के अनुसार यह कुर्की गबन की गई पूरी राशि और उससे अर्जित कथित अवैध संपत्तियों को कवर करती है। मामले में बैंक अधिकारियों, नगर निगम के कर्मचारियों और कई निजी व्यक्तियों व कंपनियों की भूमिका जांच के दायरे में है।
कैसे सामने आया करोड़ों का बैंक घोटाला?
ईडी की जांच हरियाणा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB), पंचकूला द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई। आरोप है कि नगर निगम पंचकूला के सरकारी फंड को बैंक अधिकारियों और निगम के कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से सुनियोजित तरीके से गबन किया गया। जांच में खुलासा हुआ कि सरकारी धन को नगर निगम के अधिकृत खातों से निकालकर फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया और बाद में उसे कई व्यक्तियों व कंपनियों के जरिए इधर-उधर भेजकर धन के स्रोत को छिपाने की कोशिश की गई।
फर्जी दस्तावेजों से खोले गए दो बैंक खाते
ईडी के मुताबिक, उस समय कोटक महिंद्रा बैंक में डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट रहे पुष्पिंदर सिंह, नगर निगम अधिकारी विकास कौशिक और बैंक कर्मचारी दिलीप राघव की कथित मिलीभगत से नगर निगम के नाम पर दो अनधिकृत बैंक खाते खोले गए। इन खातों को खोलने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज और जाली प्राधिकरण पत्रों का इस्तेमाल किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि नगर निगम द्वारा भेजे गए वास्तविक पत्रों और अधिकृत निर्देशों को नजरअंदाज कर समानांतर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए, जिनके आधार पर करोड़ों रुपये इन खातों में ट्रांसफर किए गए।
मोबाइल नंबर और ई-मेल बदलकर तोड़ी गई सुरक्षा
ईडी का दावा है कि आरोपियों ने केवल फर्जी खाते ही नहीं खोले, बल्कि नगर निगम के असली बैंक खातों से जुड़े मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी भी बदल दिए। जांच एजेंसी के अनुसार इन बदलावों से बैंक की आंतरिक सुरक्षा प्रणाली, ओटीपी सत्यापन और अधिकृत पुष्टि प्रक्रिया को निष्प्रभावी कर दिया गया, जिससे बिना किसी संदेह के करोड़ों रुपये के लेन-देन किए जा सके।
कई खातों में घुमाया गया पैसा
जांच में पता चला कि फर्जी खातों में रकम आने के बाद उसे रजत दहरा, स्वाति तोमर, कपिल कुमार, विनोद कुमार, सोनिया सहित कई व्यक्तियों तथा एस.के. एग्रोटेक और एस.के. एग्रोफर्म जैसी कंपनियों के खातों में ट्रांसफर किया गया। ईडी का आरोप है कि इन खातों का इस्तेमाल मनी ट्रेल छिपाने के लिए किया गया। बाद में यही रकम कथित तौर पर पुष्पिंदर सिंह, उनकी पत्नी प्रीति ठाकुर और उनसे जुड़ी कंपनियों तक पहुंची तथा उससे कई चल और अचल संपत्तियां खरीदी गईं।
36% ब्याज पर बांटे गए करोड़ों के लोन
जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। ईडी के अनुसार कथित गबन की गई रकम से कई व्यक्तियों और कंपनियों को करीब 3 प्रतिशत प्रतिमाह (36 प्रतिशत वार्षिक) की दर से असुरक्षित ऋण दिए गए। इनमें सनी गर्ग, प्रियंका गर्ग, समर मोहन रंगा, आर्यन सिंह सहित कई लोग तथा सनत रियल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड, सेंट्रल इंफ्राडेवलपर्स, सनत वेंचर्स एंटरप्राइजेज एलएलपी, सैवेज रिकॉर्ड्स प्राइवेट लिमिटेड और सनत एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियां शामिल हैं।
पत्नी की कंपनी के कारोबार में अचानक उछाल
ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि पुष्पिंदर सिंह की पत्नी प्रीति ठाकुर की कंपनी चौधरी एंड सेठी लीगल एडवाइजरी प्राइवेट लिमिटेड के कारोबार और आय में वित्त वर्ष 2022-23 के बाद असामान्य वृद्धि दर्ज की गई। एजेंसी का आरोप है कि इस कंपनी का इस्तेमाल कथित अपराध से अर्जित धन को वैध दिखाने और चल-अचल संपत्तियों के निपटान के लिए किया गया।
ED की रेड में मिले अहम सबूत
22 अप्रैल 2026 को ईडी ने पुष्पिंदर सिंह, विकास कौशिक, दिलीप कुमार राघव, रजत दहरा, सनी गर्ग, कपिल कुमार और उनसे जुड़ी कंपनियों व परिसरों पर एक साथ छापेमारी की। छापों के दौरान बड़ी मात्रा में वित्तीय दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य अहम साक्ष्य बरामद किए गए, जिन्हें जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लग्जरी कारों और करोड़ों की संपत्तियों का खुलासा
ईडी की जांच में सामने आया कि कथित गबन की रकम से कई महंगी गाड़ियां खरीदी गईं। इनमें पोर्श कायेन, बीएमडब्ल्यू 740Li, बीएमडब्ल्यू X7, बीएमडब्ल्यू 749i, दो जीप रैंगलर (2021 और 2024 मॉडल), बीएमडब्ल्यू Z4, टोयोटा लैंड क्रूजर और हार्ले डेविडसन जैसी लग्जरी गाड़ियां शामिल हैं। एजेंसी का दावा है कि घोटाले का खुलासा होने के बाद इनमें से कई वाहन तीसरे पक्ष को बेच दिए गए। इसके अलावा पंचकूला के सेक्टर-2 स्थित कुछ संपत्तियों को कथित तौर पर परिवार के अन्य सदस्यों के नाम ट्रांसफर कर कुर्की से बचाने की कोशिश की गई।
107 करोड़ की मनी ट्रेल, 131 करोड़ की संपत्ति कुर्क
ईडी के अनुसार जांच में अब तक 107.24 करोड़ रुपये की मनी ट्रेल का पता लगाया जा चुका है। इसके आधार पर एजेंसी ने 131.13 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां कुर्क की हैं। इनमें 12.85 करोड़ रुपये बैंक खातों में जमा राशि और 118.28 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियां शामिल हैं। एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई कथित अपराध से अर्जित पूरी अवैध संपत्ति को सुरक्षित करने के उद्देश्य से की गई है।
मास्टरमाइंड गिरफ्तार, 9 आरोपियों पर केस
ईडी ने बताया कि मामले के कथित मास्टरमाइंड और कोटक महिंद्रा बैंक के पूर्व शाखा प्रबंधक पुष्पिंदर सिंह को 1 जून 2026 को गिरफ्तार किया गया था। अब एजेंसी ने PMLA की धारा 44 और 45 के तहत 9 आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल कर दी है। मामले की जांच अभी जारी है और एजेंसी का कहना है कि आने वाले समय में इस घोटाले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।