
कसडोल। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के कसडोल विकासखंड के सुकली गांव में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे गांव को हैरान कर दिया। जिस युवक को परिवार ने मृत मानकर अंतिम संस्कार कर दिया था, वही युवक करीब 15 दिन बाद अचानक जिंदा घर लौट आया। दरवाजे पर उसे खड़ा देखकर परिवार कुछ देर के लिए स्तब्ध रह गया। कुछ दिन पहले जिस घर में मातम था, वहां अब खुशी का माहौल है। लेकिन इस खुशी के साथ एक बेहद बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है, आखिर जिस शव का मोतीलाल समझकर अंतिम संस्कार किया गया था, वह किसका था?
अचानक लापता हुआ था 28 वर्षीय मोतीलाल
सुकली गांव निवासी 28 वर्षीय मोतीलाल विश्वकर्मा के लापता होने के बाद परिजनों ने गिरौदपुरी चौकी में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया जा रहा है कि मोतीलाल की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी और वह कुछ समय पहले घर से अचानक गायब हो गया था। परिवार उसकी तलाश कर ही रहा था कि कुछ दिनों बाद पुलिस को एक नाले में एक युवक की सड़ी-गली लाश मिली।
पानी में खराब हो चुकी थी शव की हालत
नाले में लंबे समय तक पड़े रहने के कारण शव काफी खराब स्थिति में था। चेहरा और शरीर की पहचान करना आसान नहीं था। पुलिस और परिजनों ने शव की कद-काठी और दूसरे उपलब्ध संकेतों के आधार पर उसे मोतीलाल का मान लिया। परिवार ने शव को अपना मानकर अंतिम संस्कार कर दिया। इसके बाद परिवार ने शोक की रस्में भी पूरी कर लीं। दशगात्र और मृत्युभोज तक कराया गया। परिजनों को पूरी तरह विश्वास था कि मोतीलाल अब इस दुनिया में नहीं है।
फिर 15 दिन बाद दरवाजे पर पहुंचा ‘मृत’ युवक
कहानी में सबसे बड़ा मोड़ इसके करीब 15 दिन बाद आया। जिस युवक की मौत का मातम परिवार मना चुका था, वही मोतीलाल अचानक घर वापस आ गया।उसे सामने जिंदा देखकर परिवार के लोगों को पहले तो यकीन ही नहीं हुआ। कुछ देर बाद जब उन्हें समझ आया कि सामने खड़ा व्यक्ति मोतीलाल ही है, तो घर का माहौल पूरी तरह बदल गया। जिस परिवार ने कुछ दिन पहले बेटे की मौत पर आंसू बहाए थे, उसी घर में उसके जिंदा लौटने की खुशी में भावुक माहौल बन गया।
अब सबसे बड़ा रहस्य- आखिर चिता पर किसका शव जला?
मोतीलाल के जिंदा लौटने के बाद पुलिस के सामने कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
- नाले से मिला शव आखिर किसका था?
- उसकी पहचान मोतीलाल के रूप में कैसे हुई?
- क्या वह किसी दूसरे लापता व्यक्ति का शव था?
- शव की पहचान के लिए क्या पर्याप्त प्रक्रिया अपनाई गई थी?
- बिना पुख्ता पहचान के अंतिम संस्कार कैसे हो गया?
इन सवालों के जवाब मिलना अब बेहद जरूरी है, क्योंकि मामला सिर्फ पहचान की गलती तक सीमित नहीं है। इसके पीछे किसी दूसरे परिवार के अपने सदस्य की तलाश का सवाल भी जुड़ा हो सकता है।
गिरौदपुरी पुलिस ने शुरू की जांच
मामला सामने आने के बाद गिरौदपुरी पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब नाले से बरामद शव से जुड़े पुराने रिकॉर्ड, गुमशुदगी की रिपोर्ट और उपलब्ध पहचान संबंधी साक्ष्यों को दोबारा खंगाल रही है। साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि शव की वास्तविक पहचान क्या थी और उसकी पहचान में गलती किस स्तर पर हुई।
एक शव ने बदल दी पूरे गांव की कहानी
यह मामला इसलिए भी असामान्य है क्योंकि एक परिवार ने जिस व्यक्ति को खो दिया समझकर उसकी अंतिम विदाई तक कर दी, वही व्यक्ति कुछ दिनों बाद उनके सामने जिंदा खड़ा मिला। अब मोतीलाल का लौटना तो परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं, लेकिन नाले में मिले उस अज्ञात शव की पहचान पुलिस के लिए सबसे बड़ी पहेली बन गई है। जिसे परिवार ने अपना समझकर चिता के हवाले कर दिया, वह आखिर कौन था ? इस सवाल का जवाब अब पुलिस जांच ही देगी।