भिलाई। छत्तीसगढ़ के हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, भिलाई में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार (कुलसचिव) भूपेंद्र कुमार कुलदीप पर आरोप है कि उन्होंने एक दैनिक वेतनभोगी महिला कर्मचारी पर दबाव बनाकर करीब 18 महीनों तक उसकी अधिकांश सैलरी अपने बेटे के बैंक खाते में ट्रांसफर करवाई। मामले की विभागीय जांच में आरोपों को प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया। बाद में उन्हें नियमानुसार जमानत/मुचलके पर रिहा कर दिया गया।

18 महीने तक वेतन का बड़ा हिस्सा बेटे के खाते में जाने का आरोप
जानकारी के अनुसार, पीड़ित महिला कर्मचारी शुभांगी मराठे, दुर्ग के राजीव गांधी नगर की निवासी हैं और विश्वविद्यालय में अर्द्धकुशल दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में कार्यरत हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि महिला को हर महीने मिलने वाले वेतन का बड़ा हिस्सा रजिस्ट्रार कथित रूप से दबाव बनाकर फोनपे और पेटीएम के माध्यम से अपने बेटे के खाते में ट्रांसफर करवाते थे। महिला के पास हर महीने अपने खर्च और परिवार के पालन-पोषण के लिए केवल करीब दो हजार रुपये ही बचते थे।

जांच समिति ने बैंक रिकॉर्ड खंगाले
शिकायत मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कुलपति के निर्देश पर तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की। समिति ने महिला के बैंक खाते और 35 पन्नों के डिजिटल ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड की जांच की। जांच रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2025 से जुलाई 2026 के बीच महिला के खाते में 1,77,137 रुपये वेतन जमा हुए, जिनमें से 1,49,384 रुपये कथित तौर पर रजिस्ट्रार के बेटे के खाते में ट्रांसफर किए गए। यह कुल वेतन का लगभग 84 प्रतिशत बताया गया है।

पुलिस ने दर्ज किया मामला
जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर मोहन नगर थाना में रजिस्ट्रार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(4) सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया, जिसके बाद उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत मुचलके पर रिहा कर दिया गया।

महिला से घरेलू काम कराने का भी आरोप 
शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया है कि रजिस्ट्रार महिला कर्मचारी से अपने घर का खाना बनवाने सहित अन्य निजी कार्य भी कराते थे। इन आरोपों की जांच जारी है और संबंधित पक्ष की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

जांच जारी, आगे हो सकती है विभागीय कार्रवाई
पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन दोनों स्तरों पर मामले की जांच जारी है। जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाएगी।