
रायपुर-दुर्ग में 45 अफसरों का सर्च ऑपरेशन पूरा। बोगस बिलिंग और बेनामी निवेश के मिले इनपुट।
रायपुर. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम रायपुर और भिलाई में प्रॉपर्टी और ट्रांसपोर्ट कारोबारियों के ठिकानों पर दबिश देकर लौट गई है। 27 अक्टूबर की सुबह शुरू हुई यह छापेमारी करीब 19 घंटे तक चली। ईडी की 45 सदस्यीय टीम ने जांच के दौरान 21 लाख रुपए नकद और करोड़ों रुपए की संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं। शुरुआती जांच में बोगस बिलिंग और बड़े पैमाने पर नकद वित्तीय लेन-देन के इनपुट मिले हैं।
राजधानी रायपुर के रविनगर निवासी प्रॉपर्टी डीलर नितिन डागा और दुर्ग-भिलाई के रियल एस्टेट कारोबारी व ट्रांसपोर्टर गुलशन बघेल के ठिकानों पर यह कार्रवाई की गई। टीम ने रविनगर स्थित सुशील विला और आरंग में डागा के सराफा शोरूम को जांच के दायरे में रखा। वहीं, भिलाई में बघेल के ठिकानों पर दस्तावेजों को खंगाला गया।
जब्ती में क्या-क्या मिला?
- 21 लाख रुपए नकद।
- कई जमीनों और बेनामी संपत्तियों की रजिस्ट्रियां।
- बोगस बिलिंग से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड।
- कारोबारियों के मोबाइल, लैपटॉप और हार्ड डिस्क।
छापेमारी के दौरान जांच दल ने मकान और दफ्तर के कोने-कोने की तलाशी ली। डिजिटल उपकरणों का डेटा डंप किया गया है। अधिकारियों ने बरामद दस्तावेजों को सामने रखकर दोनों कारोबारियों और उनके करीबियों से घंटों पूछताछ की। निवेश और बैंक खातों में हुए ट्रांजेक्शन का हिसाब मांगा गया। सूत्रों के मुताबिक, कारोबारी कई जमीनों और बड़े लेन-देन का संतोषजनक हिसाब नहीं दे सके। इन संपत्तियों के खिलाफ अब प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की जा रही है। कार्रवाई पूरी होने के बाद ईडी की टीम सभी जब्त सबूतों के साथ वापस लौट गई है। जाते-जाते अधिकारियों ने दोनों कारोबारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्हें जांच पूरी होने तक बिना पूर्व सूचना के शहर से बाहर जाने की मनाही है। साथ ही, जब भी जरूरत होगी, उन्हें अपना बयान दर्ज कराने ईडी कार्यालय में उपस्थित होना पड़ेगा।
पंजीयन विभाग से मांगा गया रिकॉर्ड
ईडी ने संपत्तियों के दस्तावेजों की जांच के बाद राज्य के पंजीयन विभाग से संपर्क किया है। कारोबारियों, उनके रिश्तेदारों और फर्म के कर्मचारियों के नाम पर पिछले कुछ सालों में खरीदी गई जमीनों की पूरी जानकारी मांगी गई है। आशंका है कि नकद की बड़ी खेप खपाने के लिए कर्मचारियों या अन्य लोगों के नाम पर भी प्रॉपर्टी खरीदी गई है।
जांच का मुख्य फोकस अब ट्रांसपोर्ट और रियल एस्टेट कारोबार में हुए भारी निवेश पर है। गुलशन बघेल के ट्रांसपोर्ट बिजनेस में आई रकम के स्रोतों की पड़ताल की जा रही है। यह देखा जा रहा है कि किन-किन कंपनियों के साथ ट्रांसपोर्टेशन का काम हुआ और बिलिंग की प्रक्रिया क्या थी। वहीं, नितिन डागा के आरंग स्थित सराफा शोरूम और प्रॉपर्टी डीलिंग के धंधे में हुए वित्तीय लेन-देन की एंट्री का मिलान किया जा रहा है।
जांच का अगला दायरा
- जब्त डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच।
- बोगस बिलिंग में शामिल डमी कंपनियों की पहचान।
- बैंक लॉकर और खातों के पिछले पांच साल के स्टेटमेंट की पड़ताल।
ईडी की नजर अब इस बात पर है कि बोगस बिलिंग के जरिए जो नकद पैसा घुमाया गया, वह असल में कहां से आया था। इसके लिए सीए और अकाउंटेंट से भी पूछताछ की जा सकती है। फिलहाल, टीम बरामद किए गए हार्ड डिस्क और फाइलों की अपने दफ्तर में बैठकर स्क्रूटनी कर रही है और पंजीयन विभाग से आने वाली रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।