Sarcopenia Symptoms & Prevention: बढ़ती उम्र के साथ मांसपेशियों (Muscles) का धीरे-धीरे कम होना सामान्य माना जाता है। लेकिन यदि 30–40 वर्ष की उम्र में ही मांसपेशियां कमजोर होने लगें, ताकत घटने लगे या रोजमर्रा के काम कठिन महसूस होने लगें, तो यह सार्कोपेनिया (Sarcopenia) नामक बीमारी का संकेत हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या पहले मुख्य रूप से बुजुर्गों में देखी जाती थी, लेकिन अब खराब खानपान, शारीरिक निष्क्रियता, डायबिटीज और अनियमित जीवनशैली के कारण कम उम्र के लोगों में भी इसके मामले बढ़ रहे हैं।

क्या है Sarcopenia?
सार्कोपेनिया एक ऐसी चिकित्सीय स्थिति है, जिसमें शरीर की मांसपेशियों का द्रव्यमान (Muscle Mass), ताकत और कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। इस शब्द का पहली बार 1989 में डॉ. इरविन रोसेनबर्ग ने इस्तेमाल किया था और वर्ष 2016 में इसे आधिकारिक तौर पर एक बीमारी के रूप में मान्यता दी गई। भारत में भी Geriatric Society of India ने इसके समय पर पहचान और इलाज के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं, ताकि लोगों में मांसपेशियों की कमजोरी का जल्द पता लगाया जा सके।

कम उम्र में क्यों बढ़ रहे हैं मामले?
विशेषज्ञों के अनुसार, Sarcopenia के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें प्रमुख हैं

  • प्रोटीन की कमी वाला आहार
  • शारीरिक गतिविधि और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग का अभाव
  • लंबे समय तक बैठकर काम करने की आदत
  • टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज
  • बढ़ती उम्र
  • कुछ मामलों में लंबे समय तक स्टेरॉयड का उपयोग

डायबिटीज वाले लोगों में क्यों बढ़ जाता है खतरा?
डायबिटीज से पीड़ित लोगों में Sarcopenia का जोखिम अधिक माना जाता है।

  • टाइप-1 डायबिटीज में इंसुलिन की कमी के कारण मांसपेशियों का निर्माण प्रभावित हो सकता है।
  • टाइप-2 डायबिटीज में इंसुलिन रेजिस्टेंस विकसित होने से शरीर मांसपेशियों को सही ढंग से बनाए नहीं रख पाता।

विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ी रहने से नई मांसपेशियां बनने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है, जबकि पुरानी मांसपेशियों का टूटना बढ़ सकता है। इससे कमजोरी, संतुलन में कमी और शारीरिक क्षमता प्रभावित हो सकती है।

एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
डॉ. के अनुसार, शरीर में मांसपेशियां लगातार टूटती और दोबारा बनती रहती हैं। इस प्रक्रिया के लिए हर दिन पर्याप्त और अच्छी गुणवत्ता वाला प्राकृतिक प्रोटीन जरूरी है। उनका कहना है कि अधिकांश लोग अपनी दैनिक जरूरत के अनुसार प्रोटीन नहीं ले पाते। यदि लंबे समय तक ऐसा होता रहे, तो मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि आजकल घंटों बैठकर काम करने और स्ट्रेंथ एक्सरसाइज न करने की वजह से भी मांसपेशियों का उपयोग कम हो जाता है, जिससे Sarcopenia का खतरा बढ़ सकता है।

कैसे करें बचाव?
विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ आसान आदतें अपनाकर Sarcopenia के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है

  • रोजाना पर्याप्त मात्रा में प्राकृतिक प्रोटीन लें, जैसे दाल, दूध, पनीर, अंडे, अंकुरित अनाज और दही।
  • सप्ताह में कम से कम 2–3 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या रेजिस्टेंस एक्सरसाइज करें।
  • लंबे समय तक लगातार बैठने से बचें और नियमित रूप से सक्रिय रहें।
  • डायबिटीज या अन्य पुरानी बीमारियों को नियंत्रण में रखें।
  • बिना डॉक्टर की सलाह के स्टेरॉयड या प्रोटीन सप्लीमेंट का सेवन न करें।

ध्यान दें: यदि कम उम्र में लगातार मांसपेशियां कमजोर हो रही हों, वजन घट रहा हो, चलने-फिरने में कठिनाई महसूस हो रही हो या रोजमर्रा के काम करने में परेशानी हो रही हो, तो स्वयं अनुमान लगाने के बजाय किसी फिजिशियन या एंडोक्राइनोलॉजिस्ट से सलाह लेकर उचित जांच कराना बेहतर है।