
नई दिल्ली। भारतीय राजनीति में कभी-कभी ऐसे घटनाक्रम होते हैं जो रातोंरात किसी अनजान नाम को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला देते हैं। नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। जिस पार्टी को कुछ समय पहले तक राजनीतिक गलियारों में मुश्किल से कोई पहचानता था, वही पार्टी अब देशभर में चर्चा का विषय बन गई है। वजह है, तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों का, इस पार्टी में विलय, जिसने बंगाल की राजनीति में भूचाल ला दिया है।
दिलचस्प बात यह है कि 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में NCPI का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा था। पार्टी के उम्मीदवारों को कुल मिलाकर महज कुछ सौ वोट मिले थे और चुनाव खत्म होते ही पार्टी लगभग राजनीतिक परिदृश्य से गायब हो गई थी। लेकिन अब वही पार्टी अचानक राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ एक दल-बदल नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति में बदलते समीकरणों का संकेत है।
अब सवाल यह है कि क्या NCPI सिर्फ बागी सांसदों का अस्थायी ठिकाना बनेगी या फिर यह पार्टी पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नई ताकत के रूप में उभरेगी? 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले इस घटनाक्रम ने बंगाल के राजनीतिक भविष्य को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल, एक बात तय है कि जिस पार्टी को कभी सैकड़ों वोट भी मुश्किल से मिले थे, वह आज संसद और सियासत दोनों के केंद्र में खड़ी दिखाई दे रही है।