कोरबा। कटघोरा के अटल परिसर में स्थापित पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। हाल की बारिश के बाद प्रतिमा की बाहरी परत उखड़ने का दावा किया जा रहा है, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि तांबे की बताई गई प्रतिमा वास्तव में सीमेंट से तैयार की गई है और उसे तांबे जैसा दिखाने के लिए पेंट किया गया। इन आरोपों के बाद प्रतिमा की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

14 लाख की लागत पर उठे सवाल
जानकारी के अनुसार, प्रतिमा की स्थापना पर करीब 14 लाख खर्च किए गए थे। अब स्थानीय लोगों और विपक्षी नेताओं का कहना है कि यदि निर्माण में तय मानकों का पालन नहीं हुआ, तो यह सार्वजनिक धन के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े करता है। लोगों ने पूरे मामले की तकनीकी जांच कराने और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच की मांग की है।

बारिश के बाद क्यों बढ़ा विवाद?
स्थानीय लोगों का दावा है कि हालिया बारिश के बाद प्रतिमा की बाहरी सतह कई जगह से उखड़ने लगी। इसके बाद प्रतिमा में इस्तेमाल की गई सामग्री को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। इसी आधार पर कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि प्रतिमा में तांबे के बजाय सीमेंट का उपयोग किया गया है। हालांकि, संबंधित निर्माण एजेंसी या प्रशासन की ओर से इस दावे की पुष्टि या खंडन अभी तक सार्वजनिक रूप से नहीं किया गया है।

नगर पालिका अध्यक्ष भी सवालों के घेरे में
इस विवाद के बीच कटघोरा नगर पालिका अध्यक्ष राज जायसवाल का नाम भी चर्चा में है। विपक्ष का आरोप है कि पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। वहीं, कुछ स्थानीय लोगों ने यह भी मांग की है कि निर्माण से जुड़े सभी दस्तावेज और तकनीकी स्वीकृतियां सार्वजनिक की जाएं।Atal Bihari Vajpayee's statue made of cement

भाजपा जिलाध्यक्ष ने उठाई जांच की मांग
मामले को लेकर भाजपा जिलाध्यक्ष ने भी निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि प्रतिमा निर्माण में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम से जुड़े किसी भी सार्वजनिक कार्य में गुणवत्ता और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

अब सबकी नजर जांच पर
फिलहाल, यह मामला आरोपों और दावों के स्तर पर है। यदि प्रशासन जांच के आदेश देता है, तो तकनीकी रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रतिमा में वास्तव में किस सामग्री का उपयोग किया गया और निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप था या नहीं।