अंबिकापुर। जशपुर में 9.84 करोड़ रुपए की सिंचाई परियोजना के टेंडर में हुई हेराफेरी अब जल संसाधन विभाग के अफसरों के गले की फांस बन गई है। लोअर डोडकी डायवर्जन स्कीम के इस मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट की कड़ी फटकार और शासन से मिले कारण बताओ नोटिस के तुरंत बाद, निविदा प्रकोष्ठ के मुख्य अभियंता केएस गुरुवर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। 20 जुलाई को नोटिस का जवाब देने के बजाय वे इस्तीफा देकर नदारद हो गए।

**नियमों को किनारे कर बांटी गई थी पात्रता**

यह पूरा मामला टेंडर प्रक्रिया में की गई मनमानी का है। निविदा प्रकोष्ठ के अफसरों ने सारे कायदे-कानून को दरकिनार करते हुए एक चहेती कंपनी को तकनीकी रूप से पात्र घोषित कर दिया था। इस गड़बड़ी का मामला जब अदालत की चौखट पर पहुंचा, तो बिलासपुर हाईकोर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाया। अदालत ने विभाग की इस मनमानी पर तगड़ी फटकार लगाते हुए 1 लाख रुपए के मुआवजे का आदेश पारित कर दिया।

**5 दिन की मोहलत, वेतन से जुर्माने की थी चेतावनी**

अदालत के इस कड़े फैसले के बाद शासन के कान खड़े हुए। इसके बाद शासन ने निविदा प्रकोष्ठ के मुख्य अभियंता के.एस. गुरुवर सहित विभाग के चार वरिष्ठ अफसरों को कारण बताओ नोटिस थमा दिया। शासन ने इन सभी अफसरों से 5 दिन के भीतर स्पष्टीकरण तलब किया था। नोटिस में कड़ी चेतावनी दी गई थी कि अगर तय समय सीमा में जवाब नहीं मिलता है, तो मुआवजे की एक लाख रुपए की राशि इन अधिकारियों के वेतन से वसूली जाएगी। साथ ही इन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।

**जवाब देने की बजाय किनारा कर गए अफसर (विश्लेषण)**

इस पूरे घटनाक्रम का विश्लेषण करें तो, शासन के नोटिस और वेतन से कटौती की भनक लगते ही के.एस. गुरुवर ने अपना पक्ष रखने के बजाय 20 जुलाई को इस्तीफा देना मुनासिब समझा और वहां से फरार हो गए। एक वरिष्ठ अफसर का बिना स्पष्टीकरण दिए, इस तरह अचानक कुर्सी छोड़ देना, टेंडर प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी की तरफ ही इशारा करता है। अगर टेंडर में सब कुछ नियमों के तहत पारदर्शी तरीके से हुआ था, तो अफसर अपना जवाब शासन के सामने मजबूती से रख सकते थे। लेकिन जुर्माने की वसूली और विभागीय कार्रवाई के डर से इस्तीफे का रास्ता चुनना, इस पूरी निविदा प्रक्रिया में हुए खेल को उजागर करता है।

**आफताब आलम को मिला नया प्रभार**

इस बीच, जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, के.एस. गुरुवर के पद छोड़ने के बाद विभाग में नया प्रभार सौंप दिया गया है। अब अधीक्षण अभियंता (बोधी) आफताब आलम को आगामी आदेश तक निविदा प्रकोष्ठ के मुख्य अभियंता की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा उन्हें नाबार्ड संबंधी कार्यों के नोडल अधिकारी और बांध सुरक्षा प्रकोष्ठ का अतिरिक्त प्रभार भी सौं

पा गया है।