कोरिया। जिला आबकारी विभाग से जुड़ा एक कथित वायरल वीडियो इन दिनों चर्चा में है। सोशल मीडिया और अलग-अलग वाट्सऐप समूहों में चल रहे वीडियो में विभाग से जुड़े बताए जा रहे एक व्यक्ति की शराब दुकान के कर्मचारियों से बहस होती दिखाई दे रही है। वीडियो में शराब की बोतल भी नजर आती है। इसके साथ यह दावा किया जा रहा है कि दुकान बंद होने के बाद संबंधित व्यक्ति कर्मचारियों से शराब मांग रहा था।

वीडियो की तारीख, जगह और उसमें दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में वीडियो के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी मानना जल्दबाजी होगी। लेकिन वीडियो के साथ चल रहे संदेशों में लगाए गए आरोपों ने आबकारी विभाग की कामकाज की व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

दुकान बंद, फिर शराब की मांग क्यों?

वायरल वीडियो को लेकर सबसे बड़ा सवाल दुकान बंद होने के समय को लेकर है। दावा किया जा रहा है कि दुकान का समय खत्म होने के बाद भी कर्मचारियों पर शराब देने के लिए दबाव बनाया गया। कर्मचारियों का कहना है कि संबंधित व्यक्ति खुद को विभाग का बड़ा बाबू बताकर दबाव बनाता था और शराब नहीं देने पर गाली-गलौज करता था।

वीडियो में व्यक्ति और कर्मचारियों के बीच कहासुनी जैसी स्थिति दिखाई देती है। साथ ही वीडियो को लेकर यह भी दावा किया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति पहले से नशे में था। हालांकि केवल वीडियो देखकर किसी के नशे में होने की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसके लिए मेडिकल जांच या किसी दूसरे स्वतंत्र प्रमाण की जरूरत होगी।

अब सवाल यह भी है कि यदि दुकान बंद होने के बाद शराब मांगने की बात सही है तो कर्मचारियों पर ऐसा दबाव किस आधार पर बनाया गया? और यदि यह पहली घटना नहीं थी, तो पहले शिकायत क्यों नहीं हुई?

कर्मचारियों के बयान से सामने आ सकती है पूरी बात

मामले की जांच होती है तो शराब दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों के बयान अहम हो सकते हैं। यह पता किया जाना चाहिए कि क्या किसी कर्मचारी ने पहले भी इस तरह की शिकायत की थी। साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि मामला केवल एक दुकान तक सीमित है या दूसरी दुकानों के कर्मचारी भी इसी तरह की बात कह रहे हैं।

यदि कर्मचारी किसी विभागीय कर्मचारी के दबाव में काम करते हैं तो शिकायत करना उनके लिए आसान नहीं होता। ऐसे में बयान दर्ज करते समय यह ध्यान रखना होगा कि कर्मचारी बिना किसी दबाव के अपनी बात रख सकें।

हाजिरी के नाम पर पैसे मांगने का आरोप

इसी मामले के बीच शराब दुकानों से जुड़े कर्मचारियों की ओर से हाजिरी को लेकर भी आरोप सामने आने की बात कही जा रही है। दावा है कि छुट्टी पर रहने या किसी वजह से ऑनलाइन हाजिरी दर्ज नहीं होने पर हाजिरी बनाने के नाम पर दुकान-दुकान जाकर पैसे मांगे जाते थे।

इस आरोप की भी अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन यदि ऐसा होने की बात सामने आती है तो ऑनलाइन हाजिरी की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होंगे। इसकी जांच के लिए कर्मचारियों के बयान, ऑनलाइन हाजिरी का रिकॉर्ड और कथित भुगतान से जुड़ी जानकारी देखी जा सकती है।

फिलहाल पूरा मामला वायरल वीडियो और उसके साथ चल रहे दावों तक है। वीडियो की असलियत, उसमें दिख रहे व्यक्ति की पहचान और लगाए जा रहे आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी। तब तक सवाल यही है कि शराब की दुकान बंद होने के बाद आखिर ऐसी नौबत आई ही क्यों, और यदि कर्मचारियों पर दबाव था तो वे अपनी बात कहने के लिए अब तक किसका इंतजार कर रहे थे?