सबूतों वाले दफ्तर की चाबी दागी के हाथ, 6 रिमाइंडर के बाद भी नहीं दिए दस्तावेज

 

बिलासपुर/कोटा। जल संसाधन विभाग के बहुचर्चित 'चांटापारा-II एनीकट कम काजवे' घोटाले में परत दर परत ऐसा खेल हुआ है, जिसे देखकर कहा जा सकता है- 'सईंया भए कोतवाल, अब डर काहे का'। मामले में मामले में एक के बाद ऐसे बड़े और चौंकाने वाले विरोधाभास सामने आए जो आई ए सिद्दीकी को कटघरे में खड़ा करते है। शासन ने 25 फरवरी 2019 को जारी एक आदेश में विभागीय जांच के दौरान माना कि "प्रत्यक्ष वित्तीय क्षति नहीं" हुई है। लेकिन इसी आदेश में लापरवाही के लिए जी.के. फतनानी और कमलेश्वर सिंह की एक-एक वेतनवृद्धि रोक दी गई। शिकायतकर्ता का सीधा सवाल है कि जब कोई गड़बड़ी थी ही नहीं, तो दो अफसरों को सजा क्यों? और अगर गड़बड़ी थी, तो एफआईआर में नामजद मुख्य आरोपी तत्कालीन सहायक अभियंता आई.ए. सिद्दीकी को बिना कार्यवाही क्यों छोड़ दिया गया?

 

खास बात यह है कि इसके बाद शासन ने खुद 15 जनवरी 2021 के आदेश में यह माना कि प्रकरण में भारी भ्रष्टाचार हुआ है, एनीकट अनुपयोगी है और शासन को क्षति हुई है। आदेश में दोषियों पर कार्रवाई की बात थी, लेकिन आज तक इस आदेश को ठेंगा दिखाया जा रहा है।

10 बिंदुओं पर जानकारी मांगी, ईई बनकर फाइल दबाए रहे सिद्दीकी

शासन ने 2 फरवरी 2021 को पत्र लिखकर भ्रष्टाचार से जुड़े 10 अहम बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। इस पत्र से जुड़े सारे मूल रिकॉर्ड और दस्तावेज कोटा संभाग में रखे हुए थे। हैरानी की बात यह है कि एफआईआर में नामजद आरोपी सिद्दीकी को ही 30 सितंबर 2022 से 3 जनवरी 2025 तक इसी कोटा संभाग का कार्यपालन अभियंता (ईई) बनाकर बैठा दिया गया। दागी अफसर खुद सबूतों की चाबी लेकर बैठा था, नतीजा यह हुआ कि शासन के बार-बार रिमाइंडर भेजने के बाद भी आज तक उन 10 बिंदुओं का जवाब गोल है।

बिना दस्तावेजों के कोर्ट में पेश हो गया खात्मा

जिस अफसर पर धोखाधड़ी, कूटरचना और भ्रष्टाचार (अपराध क्रमांक 15/2018) का केस दर्ज था, विभाग ने उसे उसी दफ्तर में बैठा दिया जहां घोटाले की माप पुस्तिका (एमबी), ठेकेदार के बिल और अहम पत्राचार रखे थे। शिकायतकर्ता लक्ष्मीकांत निर्णेजक का आरोप है कि पदस्थापना का मकसद ही सबूतों को खुर्द-बुर्द करना था। कमान हाथ में आते ही अभिलेख गायब कर दिए गए। इसी का फायदा उठाकर 26 मई 2023 को एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने बिना मूल दस्तावेजों के ही कोर्ट में सबूतों के अभाव वाली क्लोजर रिपोर्ट (खात्मा) पेश कर दी। बिना दस्तावेजों की यह क्लोजर रिपोर्ट भ्रष्टाचार को संस्थागत संरक्षण देने की पोल खोलती है।

सुप्रीम कोर्ट के नियम ताक पर, मुख्य आरोपी बन गया चीफ इंजीनियर

घोटाले को रफा-दफा करने के लिए विभाग ने एसीबी से पूरी तरह असहयोग किया। 25 जनवरी 2019 को एसीबी ने 19 बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। 6 बार रिमाइंडर भेजे गए, पर विभाग ने रद्दी में डाल दिए। एसीबी ने भी सीआरपीसी की धारा 91 के तहत दस्तावेज जब्त करने का अपना पावर इस्तेमाल नहीं किया और हथियार डाल दिए। हद तो तब हो गई जब कोर्ट में खात्मा पेश होने के ठीक एक महीने बाद 28 जून 2023 को सिद्दीकी को ईई के पद पर प्रमोशन दे दिया गया। विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) ने सुप्रीम कोर्ट के 'के.वी. जानकीरमन प्रकरण' के 'सीलबंद लिफाफा' (Sealed Cover Procedure) नियम की धज्जियां उड़ा दीं। आज वही अफसर सरकार की मेहरबानी से मुख्य अभियंता (चीफ इंजीनियर) के प्रभार पर मजे काट रहा है। यह सीधे तौर पर संविधान के समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) का खुला मज़ाक है।

आदेशों में विरोधाभास का खुला खेल

  •  25.02.2019: शासन ने कहा "प्रत्यक्ष क्षति नहीं", फिर भी दो अफसरों पर गिरी गाज। मुख्य आरोपी सिद्दीकी पर कोई कार्रवाई नहीं।
  •   15.01.2021: शासन ने खुद स्वीकार किया कि भ्रष्टाचार हुआ और सरकार को नुकसान पहुंचा (शिकायत के अनुसार)। इस आदेश का खात्मा रिपोर्ट में कोई जिक्र नहीं।
  •  02.02.2021: 10 बिंदुओं पर जानकारी मांगी, आरोपी के ईई रहते कोई जवाब नहीं भेजा गया।

फाइलों से ऐसे पार हुआ 'काजवे' शब्द

यह पूरा फर्जीवाड़ा 17 सितंबर 2009 को शुरू हुआ था। प्रशासकीय स्वीकृति "चांटापारा-II एनीकट कम काजवे" के नाम से मिली थी, ताकि पानी रुकने के साथ ग्रामीण नाले के आर-पार जा सकें। लेकिन तकनीकी स्वीकृति के वक्त फाइलों में ऐसा खेल हुआ कि 'काजवे' शब्द ही उड़ा दिया गया। मौके पर सिर्फ एक साधारण एनीकट बना और काजवे के नाम की लाखों की रकम ठिकाने लगा दी गई।

तारीखों में दर्ज मेहरबानी की कहानी

  •   01 सितंबर 2018: आरोपी अफसर सिद्दीकी पर एफआईआर दर्ज।
  •  25 जनवरी 2019: एसीबी ने 19 बिंदुओं पर जानकारी मांगी, 6 रिमाइंडर भेजे।
  •   30 सितंबर 2022: आरोपी सिद्दीकी कोटा के ईई बने, जांच फाइलें अपने कंट्रोल में लीं।
  •  26 मई 2023: मूल दस्तावेजों के बिना ही एसीबी ने कोर्ट में खात्मा रिपोर्ट पेश कर दी।
  •  28 जून 2023: खात्मा पेश होने के महज एक महीने बाद प्रमोशन।

मूल अभिलेख सीलबंद करने की उठी मांग

इन दस्तावेजों और आदेशों के विरोधाभास के खुलासे के बाद शिकायतकर्ता ने मांग की है कि दागी अफसर की दोनों पदोन्नतियां और मुख्य अभियंता का प्रभार तत्काल निरस्त कर उन्हें निलंबित किया जाए। परिवादी ने बचे हुए सभी मूल अभिलेखों को तत्काल जब्त कर सीलबंद करने और आरोपी को उसी संभाग में पोस्टिंग देने वाले उच्चाधिकारियों की भूमिका की जांच की भी अपील की है।